CJP Protest: दिल्ली के कनॉट प्लेस के टॉलस्टॉय मार्ग के पास बुधवार की रात 8.30 बजे के आसपास एक बार फिर माहौल तनावपूर्ण हो गया। जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी अचानक से हिंसक हो गए और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया और बोतलें फेंकी, जिससे दो एसीपी सहित पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।
आंसू गैस के दागे गए गोले
प्रदर्शनकारियों के अचानक हिंसक होने के बाद मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों और आरएएफ सक्रिय हो गई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक बार फिर आंसू गैस के गोले दागे गए। सामने आए वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथ में डंडे दिखाई दिए, जो सुरक्षाकर्मियों पर चला रहे थे। हालांकि, प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने बल प्रयोग भी किया।
घायलों को अस्पताल में कराया गया भर्ती
भीड़ के अचानक हिंसक होने की वजह से घायल हुए पांच पुलिसकर्मियों को पास के राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। साथ ही, इलाके में इंटरनेट सेवा को भी बंद कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इंटरनेट सेवा को फिलहाल सुबह 6 बजे तक के लिए बंद किया गया है। इसके अलावा, पुलिसकर्मियों ने मौके पर कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के लोगों को बुलाया है।
पुलिस के मुताबिक, तलवार और खुखरी लहराई गई है। हालांकि, बाद में हालात को नियंत्रित कर लिया गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बुधवार की शाम को प्रदर्शन खत्म होने के बाद लौट रही भीड़ अचानक उग्र हो गई और पुलिस के साथ-साथ मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया। इस दौरान, पुलिस पर पथराव और बोतलें फेंके जाने की बात सामने आई।
जंतर-मंतर पर अब कैसी है स्थिति?
बताया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर स्थिति फिलहाल सामान्य है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल को अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। कनॉट प्लेस इलाके में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी मौजूद हैं। 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व वाले 'चलो संसद' प्रदर्शन के बाद से लगातार बवाल की रिपोर्ट्स सामने आ रही है।
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क्या है पूरा मामला?
सनद रहे कि शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 25वें दिन भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखी। इस दौरान, उन्होंने सरकार के सामने सशर्त अनशन को खत्म करने की बात कही। हालांकि, अभी तक सरकार की तरफ से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के सामने तीन डिमांड रख दी, जिसमें मुख्य मांगों में से एक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।
