कोटा में प्रसूताओं की मौत सीधे तौर पर ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से नहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दी रिपोर्ट

जांच रिपोर्ट में अधिकांश दवाएं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाई गई हैं। जबकि ऑक्सीटॉक्सिन इंजेक्शन टोसिन के एक बैच में निर्धारित घटक नहीं मिलने पर उसे 'नोट ऑफ स्टैण्डर्ड क्वालिटी' घोषित किया गया लेकिन सरकार का कहना है कि इससे मौत का प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं हुआ।

Kota Oxytocin Injections : कोटा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्रसूताओं की मौत की वजह ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को सीधे तौर पर मानने से इंकार कर दिया है। कोटा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मृत प्रसूताओं को प्रमुख रूप से सेप्सिस और मल्टी ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम (MODS) जैसी गंभीर जटिलताएं थीं। प्रशासन का कहना है कि उपयोग की गई अलग-अलग दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के कुल 37 सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। इसमें से 28 सैंपल जयपुर स्थित स्टेट लैब और 9 सैंपल सेंट्रल लैब कोलकाता भेजे गए थे। बता दें कि कोटा में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाए जाने से पांच महिलाओं की मौत होने का दावा किया गया। इसके बाद यह इंजेक्शन जांच के दायरे में आ गया

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प्रसूताओं की मौत की वजह ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन नहीं। -प्रतीकात्मक तस्वीर

अधिकांश दवाएं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप

जांच रिपोर्ट में अधिकांश दवाएं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाई गई हैं। जबकि ऑक्सीटॉक्सिन इंजेक्शन टोसिन के एक बैच में निर्धारित घटक नहीं मिलने पर उसे 'नोट ऑफ स्टैण्डर्ड क्वालिटी' घोषित किया गया लेकिन सरकार का कहना है कि इससे मौत का प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं हुआ। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल प्रसव को आसान बनाने और डिलीवरी के बाद होने वाले अत्यधिक ब्लीडिंग को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इंजेक्शन असर नहीं कर रहा था तो मरीज की स्थिति के अनुसार वैकल्पिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता था।

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