Swati Maliwal Manipur Visit: दिल्ली महिला आयोग (DCW) की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने मंगलवार को 4 मई के वायरल वीडियो की पीड़िता के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य के सीएम बीरेन सिंह पर सीधा हमला बोला। साथ ही उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों के आंसू उन्हें बहुत दिनों तक सोने नहीं देंगे।
मणिपुर पीड़िता से मिली स्वाति मालीवाल
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सीएम को घेरा
स्वाति मालीवाल ने इन पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने के बाद कहा कि मणिपुर की जिन दो बेटियों के साथ बर्बरता की गई, उनके परिवारों से मिली। एक लड़की के पति ने फौजी रहते हुए देश की सीमाओं की रक्षा करी। उन्होंने कहा कि अब तक उनसे मिलने तक कोई नहीं आया है। मालीवाल ने कहा- "मैं उनके पास पहुंचने वाली पहली हूं। दूसरी लड़की की मां से भी मुलाक़ात हुई। जब मैं यहां बिना सुरक्षा पहुंच सकती हूं तो अब तक सीएम या बाक़ी प्रशासन क्यों नहीं आया?"
स्वाति मालीवाल से मिलकर भावुक हुआ परिवार
स्वाति मालीवाल के साथ मुलाकात को लेकर कुछ वीडियो भी सामने आए हैं। जिसमें पीड़ित परिवार भावुक नजर आ रहा है और स्वाति मालीवाल उन्हें गले लगाकर उनका ढाढ़स बढ़ा रही हैं। स्वाति मालीवाल ने कहा- "मणिपुर की बर्बरता की पीड़ित बेटियों के परिवार से मिली… इनके ये आंसू बहुत दिन तक सोने नहीं देंगे। अब तक इनसे कोई मिलने तक नहीं आया।"
परिवार ने जताया आभार
वहीं पीड़ित परिवार ने भी इस मुलाकात के लिए स्वाति मालीवाल के प्रति आभार व्यक्त किया और कठिन परिस्थितियों में उनसे मिलने के लिए मालीवाल को धन्यवाद दिया। इससे पहले, दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने शनिवार को आरोप लगाया था कि उन्हें मणिपुर सरकार ने हिंसा प्रभावित राज्य का दौरा करने की अनुमति नहीं दी है और उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं दिया जा रहा है।
बिना सुरक्षा गई मालीवाल
मालीवाल ने मोइरांग और इंफाल जिलों की भी यात्रा की, जहां उन्होंने कई राहत शिविरों में विस्थापित लोगों से बातचीत की। यात्रा के दौरान अपने चुनौतीपूर्ण अनुभव को साझा करते हुए मालीवाल ने दावा किया कि राज्य सरकार ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा के लिए उनको सहयोग से इनकार कर दिया। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा- "ये तीन दिन मेरे लिए बेहद कठिन रहे हैं। मुझे मणिपुर में प्रवेश करने के लिए सरकार द्वारा किसी भी सहायता से इनकार कर दिया गया था और फिर भी मैं जोखिम लेकर यहां आई । वायरल वीडियो ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया और मैं हर कीमत पर पीड़ित लोगों से मिलना चाहती थी। मुझे स्थानीय लोगों ने बताया कि जीवित बचे लोगों के परिवारों से मिलने के लिए चुराचांदपुर की यात्रा करना बहुत मुश्किल है, फिर भी मैंने भारी गोलीबारी के बीच बिना किसी सुरक्षा के वहां जाने का फैसला किया।"
