Amarnath Yatra: दक्षिण कश्मीर के हिमालय में 3880 मीटर ऊंची पवित्र गुफा के लिए 60-दिवसीय सालाना तीर्थयात्रा 1 जुलाई को दो रूटों से शुरू हो रही है। इसमें पहला पारंपरिक मार्ग अनंतनाग जिले का नुनवान-पहलगाम मार्ग (दक्षिणी मार्ग) है, जो 48 किलोमीटर लंबा है, जबकि दूसरा (उत्तरी) मार्ग गांदरबल जिले का बालटाल मार्ग है, जिसकी दूरी भले 14 किलोमीटर है, लेकिन यह सीधी ढलान वाला रास्ता है। तीर्थयात्रियों को टट्टू, पिठू और पालकी पर ले जाने वाले 2900 से अधिक लोगों ने गुफा मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा से पहले सेवाओं के विस्तार के लिए रिजस्ट्रेशन कराया है। अब तक 125 टट्टू वाले, 1046 पिट्ठू वाले और 1733 पालकी वाले रजिस्टर्ड किए जा चुके हैं। कुल 2904 लोगों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इस यात्रा को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
अमरनाथ तीर्थयात्रियों के लिए सीआरपीएफ तैनात होगी
अमरनाथ यात्रा को सुचारू और दुर्घटना मुक्त सुनिश्चित करने के लिए CRPF तैयारी कर रही है। 137वीं बटालियन CRPF के सेकंड-इन-कमांड करतार सिंह ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के समय हमारी जवाबदेही बहुत बढ़ जाती है। हमने पूरी तैयारी की है। हमारी QRT(क्विक रिस्पॉन्स टीम) अभ्यास कर रही है, ऐसी छोटी-छोटी QRT हमने हर कंपनी में बनाई है।
उधर सेना की सामरिक चिनार कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने अगले महीने से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था और परिचालन तैयारियों की शुक्रवार को समीक्षा की। चिनार कोर ने ट्वीट किया कि चिनार कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने 2023 की अमरनाथयात्रा के लिए उत्तरी और दक्षिणी दोनों मार्गों पर सुरक्षा और परिचालन तैयारियों की आज समीक्षा की।
सेना ने कहा कि कोर कमांडर के साथ आतंक-रोधी किलो और विक्टर बलों के कमांडर भी थे। सेना ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल घई को यात्रा के सफल संचालन के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, मेडिकल व्यवस्था, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास के बारे में जानकारी दी गई।
