Udhhav Thackeray: महाराष्ट्र में तेज हुई सियासी हलचल के बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के मुखपत्र 'सामना' को साक्षात्कार दिया है। इस साक्षात्कार में उन्होंने बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण, चुनाव आयोग, वन नेशन वन इलेक्शन, राज ठाकरे के साथ आने की अटकलों सहित कई मुद्दों पर बात की है। उद्धव ने कहा है कि 'महाराष्ट्र में ठाकरे नाम खत्म करने की साजिश चल रही है।' बिहार में चुनाव आयोग के एसआईआर के बारे में उन्होंने कहा कि पहचान के नाम हिंदुओं को भी एनआरसी जैसे हालात से गुजरना पड़ रहा है। 'ठाकरे ब्रांड' पर उद्धव ने कहा कि ठाकरे नाम केवल एक ब्रांड नहीं है। यह महाराष्ट्र, मराठी समाज और हिंदू अस्मिता की पहचान है।
शिवसेना यूबीटी के प्रमुख हैं उद्धव ठाकरे। तस्वीर-पीटीआई
प्रश्न: ठाकरे नाम को लोग सिर्फ एक ब्रांड मानते हैं। आप इस नाम को कैसे देखते हैं?
उद्धव ठाकरे: ठाकरे नाम केवल एक ब्रांड नहीं है। यह महाराष्ट्र, मराठी समाज और हिंदू अस्मिता की पहचान है। इस पहचान को मिटाने की कोशिश करने वाले खुद इतिहास में गुम हो गए। बहुत लोग आए और गए, लेकिन जनता ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।
प्रश्न: ठाकरे नाम की ऐसी क्या खासियत है कि तीसरी पीढ़ी भी इसी नाम से राजनीति कर रही है?
उद्धव: हमारे बारे में हम क्या कहें, यह जनता को तय करना चाहिए। मेरे पास कोई पद नहीं है, फिर भी जहाँ भी जाता हूँ, लोग अपनापन दिखाते हैं। लोग मुझसे मिलते हैं और देश की घटनाओं को लेकर नाराजगी जताते हैं। वे कहते हैं कि चाहे जो हो, हम आपके साथ हैं।
प्रश्न: ठाकरे ब्रांड को खत्म करने की कोशिशें लगातार हो रही हैं, आपकी क्या राय है?
उद्धव : हां, बिलकुल। ठाकरे नाम को कमजोर करने के लिए कई 'नकली ब्रांड' बनाए जा रहे हैं। कुछ लोगों को अपने सिवा किसी और के अस्तित्व से परेशानी है। अब तो वे खुद की तुलना भगवान से करने लगे हैं।
प्रश्न: क्या आप चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान चाहते हैं?
उद्धव : बिल्कुल। बैलेट पेपर से चुनाव होना चाहिए ताकि परिणाम पर किसी को शक न हो। EVM पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोकतंत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए बैलेट पेपर की वापसी जरूरी है।
प्रश्न: क्या 2024 का विधानसभा चुनाव समन्वय की कमी से हारा गया?
उद्धव : समन्वय की कमी एक वजह थी, लेकिन असली समस्या यह थी कि लोकसभा में “हम” की भावना थी और विधानसभा में “मैं” की..साथ ही किसान कर्जमाफी जैसे तकनीकी मुद्दे भी नुकसान का कारण बने
प्रश्न: महाराष्ट्र में 60 लाख नए मतदाता जुड़ गए हैं..राहुल गांधी इसे एक सोची-समझी गड़बड़ी बता रहे हैं...
उद्धव : यह गंभीर मामला है..इतने नए मतदाता अचानक कहाँ से आ गए? बिहार में लोगों से पहचान का सबूत मांगा जा रहा है..ये कैसा लोकतंत्र है? अगर आधार कार्ड को पहचान पत्र नहीं माना जाएगा, तो फिर क्या आधार कार्ड फर्जी है? अगर नहीं है, तो उसके डेटा संग्रह, ठेके और उस पर हुए खर्च की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक होनी चाहिए..यह प्रक्रिया NRC जैसी ही लगती है और अब वह हिंदुओं पर भी लागू हो रही है..
प्रश्न: अब 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की बात हो रही है। आप इसे कैसे देखते हैं?
उद्धव : मौजूदा सत्ता की राजनीति अब तानाशाही की ओर बढ़ रही है..पहले कुछ फैसले हमें भी सही लगे थे, जैसे अनुच्छेद 370 हटाना..‘एक निशान, एक विधान, एक प्रधान’ यह नारा हम सबने सुना है..लेकिन अब ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की बात हो रही है..इसके बाद ‘वन नेशन, वन लैंग्वेज’ आएगा..बीजेपी अध्यक्ष नड्डा कह चुके हैं कि भविष्य में देश में सिर्फ एक ही पार्टी होगी..यानी देश को धीरे-धीरे ‘वन पार्टी, नो इलेक्शन’ की ओर ले जाया जा रहा है
उद्धव-'ठाकरे ब्रांड’ को खत्म करने के लिए बाहर कुछ लोग बैंड बजा रहे हैं..उन ‘बैंड वालों’ का बैंड महाराष्ट्र की जनता अवश्य बजाएगी।
प्रश्न--देवा यानी देवाभाऊ या प्रत्यक्ष देव…
उद्धव--जो कोई भी होगा वह। ऐसे लोगों के बारे में क्या कहना? ये समय की धारा में आते हैं और समय की धारा में चले जाते हैं...बरसात में जैसे केंचुए निकल आते हैं, वैसे…आप कुछ भी कहें..हमारी जो परंपरा है, अगर उसे कोई मानता नहीं है, तो वह परंपरा भी उसे स्वीकार नहीं करेगी।
प्रश्न--क्या आपने सोचा था कि भाजपा को अकेले इतनी सीटें मिलेंगी?
उद्धव-मुझे छोड़िए, उन्होंने भी कभी सपने में नहीं सोचा होगा..भाजपा छोड़िए, शिंदे गुट को भी पचास से ज्यादा सीटें मिलीं..ये जादू-टोना है या कुछ और? कदाचित उन्होंने कामाख्या मंदिर में डायनासोर काटा होगा। उनकी आधी दाढ़ी बची है, यह तो उनका नसीब है..उन्हें ज्यादा बोलना नहीं चाहिए, वरना लोग उनकी इज्जत उतार देंगे और बची हुई आधी दाढ़ी भी उखाड़ देंगे..
