JNU Sexual Harassment Controversy: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर पद से बर्खास्त किए जाने के कुछ दिन बाद मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमल अकोइजम गुरुवार को यौन उत्पीड़न के एक मामले में वसंत कुंज उत्तर थाने में जांचकर्ताओं के सामने पेश हुए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमल अकोइजम
पुलिस द्वारा अकोइजम को बुधवार को एक नोटिस दिया गया था, जिसमें उन्हें जांच में शामिल होने के लिए कहा गया था। जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर 11 अक्टूबर को प्रोफेसर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। अकोइजम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 75(1)(आई), 75(1)(चार) और 79 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं यौन उत्पीड़न और किसी महिला की लज्जा को भंग करने के इरादे से किए गए कृत्यों से संबंधित हैं।
'चिंता न करें, न्याय होगा'
पुलिस के सामने पेश होने जब वह दिल्ली के लिए रवाना हुए तो दोपहर में बड़ी संख्या में अकोइजम के समर्थक उन्हें छोड़ने के लिए इंफाल हवाई अड्डे पर एकत्र हुए। हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए, अकोइजम ने कहा, "मैं पुलिस के समन के कारण दिल्ली जा रहा हूं। चिंता न करें, न्याय होगा। यह मेरे लोगों के साथ दशकों से हुए अन्याय को खत्म करने की शुरुआत है।"
उन्होंने कहा, "न्याय के लिए लड़ना पहला कदम है। मैं अपने साथ हुए अन्याय के साथ-साथ अपने लोगों के दशकों के दुख और तकलीफों के खिलाफ भी लड़ूंगा। मुझे अच्छी तरह पता है कि आज 15 अक्टूबर है।" मणिपुर घाटी में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन 15 अक्टूबर को भारत संघ में पूर्ववर्ती मणिपुर रियासत के विलय के विरोध दिवस के रूप में मनाते हैं।
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समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के तहत 'सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स' में प्रोफेसर रहे अकोइजम को यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद नौ अक्टूबर को बर्खास्त कर दिया गया था। उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मई में कम से कम 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वह बैठकों या समारोहों के बहाने छात्राओं को परिसर स्थित अपने आवास पर बुलाते थे और उनका उत्पीड़न करने की कोशिश करते थे। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि वह कक्षा में अश्लील और अनुचित टिप्पणियां भी करते थे। इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद ने इस कार्रवाई को साजिश करार दिया और दावा किया कि उन्हें जांच समिति के निष्कर्षों का जवाब देने की अनुमति नहीं दी गई।
