सिंदूर,चूड़ी- साड़ी पर मत जाइए, ये हैं देश की पहली महिला क्राइम इंवेस्टिगेटर,काम सुन रह जाएंगे हैरान

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Mar 12, 2023, 01:32 PM IST

72 साल की डॉ रुक्मिनी कृष्णामूर्ति को देश की पहली महिला फॉरेंसिक साइंटिस्ट होने का गौरव हासिल है। इनके खाते में अनगिनत कामयाबियां है जो फॉरेंसिक साइंस में करियर बनाने वालों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है।

Rukmani Krishnamurthy forensic scientist: साड़ी, सिर पर सफेद बाल, माथे पर सिंदूर, मोतियों का हार और हाथ में सोने के कड़े। यह खास पहचान 72 साल की हो चुकीं डॉ रुक्मिनी कृष्णामूर्ति की है। हालांकि पहचान सिर्फ इतनी सी नहीं। उनसे जब सवाल किया जाता है तो मुस्कुरा कर जवाब सभी सवालों का जवाब देती हैं। लेकिन उनके काम को सुनकर आप हैरान भी हो जाएंगे। कृष्णामूर्ति, भारत की महिला क्राइम इंवेस्टिगेटर हैं जिनके खाते में अनगिनत कामयाबी है। वो भारत की पहली महिला फॉरेंसिक साइंटिस्ट हैं। यही नहीं देश में पहली प्राइवेट फॉरेंसिक लैब स्थापित करने की भी कामयाबी है।

rukamani krishnamurthy

देश की पहली महिला क्राइम इंवेस्टिगेटर रुक्मिनी कृष्णामूर्ति

खास महिला, खास कामयाबी

द इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक वो कहती हैं कि ‘1993 के मुंबई बम धमाकों की जांच में उनकी रिपोर्ट और इंटरपोल की रिपोर्ट एक जैसी थी। उन्होंने करीब 50 साल पहले फॉरेंसिक साइंस की दुनिया में कदम रखा। एनालिटिकल केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री और पीएचडी की डिग्री थी। बाद में महाराष्ट्र में डायरेक्टरेट ऑफ फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरीज की डायरेक्टर भी बनीं।रुक्मणि कृष्णामूर्ति ने 2012 में अपनी प्राइवेट फोरेंसिक लैब हेलिक एडवाइजरी को जमीन पर उतारा। देश में पहली लैब थी। प्राइवेट लैब बनाने के संबंध में कहा कि सरकारी फोरेंसिक लैबोरेटरी केवल पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों से आए मामलों की ही जांच करती हैं। लेकिन उनकी सोच यह थी कि कंपनियां और दूसरे लोग भी फोरेंसिक सर्विस का फायदा उठा सकें।

End of Feed