Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सर्किट हाउस विवाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा को निर्देश दिया है कि वे नादिया जिले के अपने प्रत्येक दौरे से कम से कम एक दिन पहले जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि अधिकारी प्रोटोकॉल के तहत उनके ठहराव और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर कर सकें।
यह आदेश प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने महुआ मोइत्रा की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कृष्णानगर लोकसभा सीट से सांसद मोइत्रा ने नादिया जिला प्रशासन द्वारा 1 सितंबर को जारी उस परिपत्र (सर्कुलर) को चुनौती दी थी, जिसमें जनप्रतिनिधियों को अपने प्रस्तावित दौरों की जानकारी 3 से 4 दिन पहले देने का नियम बनाया गया था।
किसी को असुविधा न हो- कोर्ट
सुनवाई के दौरान पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ये ऐसे छोटे मुद्दे हैं जिन्हें अदालत तक नहीं लाया जाना चाहिए और इसके लिए सिर्फ एक व्यावहारिक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की आवश्यकता है। अदालत ने कहा, "हम चाहते हैं कि इस मामले को सुलझा लिया जाए और किसी को भी असुविधा न हो।"
राज्य सरकार ने खारिज किया महुआ का आरोप
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि 1 सितंबर का विवादित सर्कुलर लागू नहीं किया जाएगा। उन्होंने याचिका में लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी ने सांसद को सर्किट हाउस खाली करने के लिए नहीं कहा था और उन्हें तमाम सुविधाएं मुहैया कराई गई थीं।
मोइत्रा ने क्या कहा?
वहीं, मोइत्रा की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि वह परिपत्र विशेष रूप से महुआ मोइत्रा को निशाना बनाने के लिए ही जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार एक सांसद का दर्जा राज्य के मुख्य सचिव से ऊपर होता है।
क्या है मामला?
मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि 14 अगस्त को उन्हें आवंटित सर्किट हाउस का कमरा खाली करने को कहा गया था। उन्होंने दावा किया था कि जब उन्होंने बाहर जाने से इनकार कर दिया, तो परिसर के बाहर भीड़ जमा हो गई जिसने 'जय श्री राम' के नारे लगाए। इस मामले को लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी।
