India Economic Conclave 2023: इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2023 के लिए टाइम्स नाउ के मैनेजिंग एडिटर निकुंज गर्ग के साथ बातचीत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, हम राज्य में इथेनॉल के प्लांट लगाना चाहते हैं और केंद्र सरकार से इसके लिए अनुमति मांग रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हो रही।
इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में भूपेश बघेल
उन्होंने कहा, हम केंद्र सरकार से कह रहे हैं कि आप इथेनॉल के रेट तय कर दीजिए। हम उसी रेट पर इसे इंडियन ऑयल को देंगे। उन्होंने कहा, अभी पेट्रोलियम में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जा सकता है, लेकिन सिर्फ छह प्रतिशत ही मिलाया जा रहा है।
एमएसपी पर नहींं मिल रहा केंद्र का पूरा सहयोग
इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2023 में भूपेश बघेल ने कहा, राज्य से किए हुए अपने वादों एवं योजनाओं को वह राज्य सरकार के आय के स्रोत की मॉनिटरिंग एवं वित्तीय अनुशासन के जरिए पूरा करते हैं। सीएम बघेल ने आरोप लगाया कि एमएसपी पर उन्हें केंद्र सरकार का पूरा सहयोग नहीं मिलता है और इस बारे में वह केंद्र सरकार को कई बार पत्र लिख चुके हैं। बघेल ने कहा कि जीएसटी का पूरा लाभ छत्तीसगढ़ को नहीं मिल पाता। क्योंकि उनका राज्य बड़ा उपभोक्ता नहीं है।
योजनाएं और वादे पूरे करने के लिए वित्तीय अनुशासन जरूरी
मैनेजिंग एडिटर निकुंज गर्ग के इस सवाल पर कि बिना लोन लिए राज्य से किए हुए वादों को वह कैसे पूरा कर पाते हैं। इस पर सीएम ने कहा कि उन्होंने राज्य की आय के जितने भी स्रोत हैं उसकी मॉनिटरिंग की और वित्तीय अनुशासन बनकर रखा। इससे राज्य को वित्तीय संकट का ज्यादा सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार सबसे ज्यादा एमएसपी देती है। एमएसपी देने में राज्य को केंद्र सरकार से ज्यादा सहयोग नहीं मिलता है। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार मार्केट फेडरेशन को लोन लेने का अधिकार देती है। यह फेडरेशन बैंकों से लोन लेता है। राज्य सरकार ने इस बार 22 हजार करोड़ रुपए का धान खरीदा है। खरीदारी में केंद्र हमारा सहयोग नहीं करती। मैंने कई बार सहयोग को लेकर उसे चिट्ठी लिखी है।
औद्योगीकरण पर बुरा प्रभाव डाल रहे जीएसटी के नियम
बातचीत में बघेल ने कहा कि जीएसटी के नियम औद्योगीकरण पर बुरा प्रभाव डालते हैं। हमें इसका पूरा लाभ नहीं मिलता है। जहां उपभोक्ता वर्ग ज्यादा है वहां जीएसटी ज्यादा मिलती है। छत्तीसगढ़ में उपभोक्ता वर्ग ज्यादा नहीं है। इसकी वजह से हमें पांच से छह करोड़ रुपए का सलाना नुकसान हो रहा है।
योजनाएं बनाने के लिए जातिगत जनगणना जरूरी
इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2023 में जातिगत जनगणना पर सीएम ने कहा कि परिस्थितियों के हिसाब से राज्य सरकारें फैसला करती हैं। पहले उदारीकरण नहीं था। नरसिम्हा राव के समय उदारीकरण हुआ। बहुत सारी जातियां पिछड़ गई हैं। जब तक आपके पास डाटा नहीं होगा, जानकारी नहीं होगी तब तक आप योजना नहीं बना पाएंगे। इसलिए जातिगत गणना की मांग की जा रही है।
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