ULFA Ban: असम को भारत से अलग करने की सोच रखने और उसके लिए काम करने वाला संगठन ‘यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम’ (ULFA) के खिलाफ मोदी सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। मोदी सरकार ने उल्फा पर प्रतिबंध को और पांच साल के लिए बढ़ा दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय उल्फा पर प्रतिबंध पांच साल के लिए बढ़ाया
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पहली बार 1990 में लगाया गया था बैन
केंद्र ने असम को भारत से अलग करने के उद्देश्य से काम करने तथा जबरन वसूली और हिंसा के लिए अन्य उग्रवादी समूहों के साथ संबंध बनाए रखने के कारण ‘यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम’ (उल्फा) पर सोमवार को प्रतिबंध पांच साल के लिए बढ़ा दिया। उल्फा को पहली बार 1990 में प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया था और तब से प्रतिबंध को समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है।
गृह मंत्रालय ने आदेश में क्या कहा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि उल्फा अपने सभी गुटों, शाखाओं और संगठनों के साथ ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा हैं। इसमें कहा गया है कि उल्फा ने असम को भारत से अलग करने के अपने उद्देश्य की घोषणा की है, अपने संगठन के लिए लगातार धन की उगाही कर रहा है तथा जबरन वसूली और हिंसा के लिए अन्य उग्रवादी समूहों के साथ संबंध बनाए हुए है।
उल्फा के खिलाफ कितने केस
अधिसूचना के मुताबिक, उल्फा के पास अवैध हथियार और गोला-बारूद है। उसके खिलाफ 27 नवंबर, 2019 से 1 जुलाई, 2024 की अवधि के दौरान असम में विस्फोट या विस्फोटक लगाने के कई मामलों सहित 16 आपराधिक मामले हैं।
