चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम रिट याचिका दाखिल की गई है। राकेश कुमार सिंह की ओर से दाखिल याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के उस अधिकार पर सवाल उठाया गया है, जिसके तहत याचिकाकर्ता के मुताबिक आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल व्यक्तिगत रूप से किए जाने का आरोप है। याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है। सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह इस मामले की पैरवी करेंगे।
सीईसी की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका (फाइल फोटो- PTI)
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‘CEC आयोग नहीं, सिर्फ चेयरमैन’
याचिका का मुख्य आधार संविधान का अनुच्छेद 324 और 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बने कानून की धारा 18 है। याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों की सुपरिंटेंडेंस, डायरेक्शन और कंट्रोल की शक्ति आयोग में निहित है, किसी एक व्यक्ति में नहीं। याचिका के मुताबिक CEC आयोग के चेयरमैन हैं, लेकिन CEC स्वयं में चुनाव आयोग नहीं हैं। धारा 18 के तहत आयोग का काम जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से होना चाहिए और मतभेद होने पर फैसला बहुमत से किया जाना है।
10 महीने में 14 बार उठे सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 अलग-अलग मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। याचिका के मुताबिक ये आपत्तियां ऐसे फैसलों और कदमों को लेकर थीं, जिन्हें दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग की मंजूरी के बिना उठाए जाने की बात कही थी।
इन आपत्तियों में चुनाव आयोग के नाम से जारी संचार और आदेश, आयोग की बैठकों के एजेंडे और मिनट्स, अधिकारियों की विदेश यात्राएं, Form-6 में बदलाव, चुनावी रोल के ERONet/ECINet डेटाबेस तक पहुंच, IT व्यवस्था में बदलाव और पश्चिम बंगाल में मतदाताओं से जुड़े मामलों में दाखिल अपील जैसे मुद्दे शामिल हैं।
Form-6 में बदलाव पर भी सवाल
याचिका में कहा गया है कि मई 2026 में चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने रिकॉर्ड पर यह आपत्ति दर्ज की कि Form-6 में SIR से जुड़े खुलासे की नई शर्त को Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन के बिना लागू नहीं किया जा सकता। इसके बाद चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति का समर्थन किया। जुलाई 2026 में यह बदलाव किए जाने का याचिका में उल्लेख है।
वोटर डेटाबेस को लेकर भी आपत्ति
याचिका में चुनावी रोल के डेटाबेस के कथित केंद्रीयकरण का मुद्दा भी उठाया गया है। इसके मुताबिक विवेक जोशी ने मई 2026 में डेटाबेस तक पहुंच के क्रेडेंशियल्स के स्वतंत्र ऑडिट की जरूरत बताई थी, जिसे बाद में संधू ने भी समर्थन दिया।
इसके अलावा 29 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर आयोग के IT ढांचे से जुड़े वर्क अलोकेशन में बदलाव को लेकर कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे। याचिका के मुताबिक दोनों का कहना था कि इस बदलाव से IT सिस्टम पर निगरानी की एक परत हट गई और यह उनके संज्ञान के बिना किया गया।
पश्चिम बंगाल में दाखिल अपीलों पर भी सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को बहाल करने वाले आदेशों के खिलाफ चुनाव आयोग के नाम से अपीलें दाखिल की गईं। 12 अगस्त 2026 को चुनाव आयुक्त संधू ने कथित तौर पर सवाल उठाया कि इन अपीलों को दाखिल करने की अनुमति किसने दी और किस अधिकार के तहत दी गई।
याचिका में कहा- पहले मूल रिकॉर्ड सामने आए
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से यह नहीं कहा है कि सिर्फ इन आपत्तियों के आधार पर संबंधित कार्रवाई को अवैध घोषित कर दिया जाए। याचिका में साफ कहा गया है कि वास्तविक स्थिति का पता आयोग के मूल रिकॉर्ड—एजेंडा, मीटिंग मिनट्स, अप्रूवल शीट, फाइल नोटिंग और आदेशों की जांच से ही चल सकता है।
CEC के खिलाफ ‘Quo Warranto’ की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से Quo Warranto जारी करने की मांग की गई है। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार से यह बताने को कहा जाने का अनुरोध है कि वह किस अधिकार के तहत ऐसी सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत पूरे चुनाव आयोग में निहित हैं।
याचिका में आगे मांग की गई है कि यदि रिकॉर्ड की जांच में यह पाया जाता है कि आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल धारा 18 के अनुरूप आयोग के निर्णय के बिना किया गया, तो ऐसे अधिकार के इस्तेमाल को बिना वैध अधिकार (without lawful title) घोषित किया जाए।
हर आदेश के लिए आयोग की मंजूरी दर्ज करने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह घोषित करने की भी मांग की गई है कि अनुच्छेद 324 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल बहुसदस्यीय चुनाव आयोग को ही करना होगा और आयोग के नाम से जारी होने वाले किसी भी कम्युनिकेशन, आदेश, निर्देश या अपील के पीछे आयोग का विधिवत निर्णय होना चाहिए।
इसके साथ ही हर बैठक से पहले एजेंडा और बैठक के बाद मिनट्स प्रसारित करने तथा आयोग के नाम से जारी हर आदेश की मंजूरी और अधिकार का रिकॉर्ड रखने के निर्देश की मांग की गई है।
