1931 तक होती थी जातिगत जनगणना,बिहार से निकला जिन्न क्या BJP के लिए बनेगा चैलेंज

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Jan 9, 2023, 07:00 PM IST

Caste Census in Bihar: देश में वैसे तो 1860 से जनगणना हो रही है। और उस समय से साल 1931 तक जातिगत जनगणना भी होती थी। लेकिन आजादी के बाद से जनगणना में केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति की ही जातियों के रुप में अलग से जनगणना की जाती रही है।

Caste Census in Bihar: बिहार में बीते शनिवार से जातिगत सर्वे शुरू हो गया है। इसमें 2.7 करोड़ जनसंख्या और 2.58 करोड़ घरों को कवर किया जाएगा और सर्वे का पूरा काम 31 मई को पूरा हो जाएगा। हालांकि बिहार सरकार ने इसे जातिगत जनगणना नहीं कहा है। लेकिन इसमें राज्य के 38 जिलों में जातियों की ही गणना की जाएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दावा है कि इसके जरिए लोगों का सही रिकॉर्ड तैयार होगा और उसका उन्हें योजनाओं में फायदा मिलेगा। लेकिन यह मामला जितना सीधा दिख रहा है, उतना हकीकत में नहीं है। क्योंकि एक तरफ नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव जातिगत जनगणना का समर्थन कर रहे हैं, वहीं केंद्रीय स्तर पर भाजपा ने जातिगत जनगणना करने से इंकार कर दिया है। हालांकि मामला इतना संवेदनशील है कि बिहार की भाजपा इकाई इसका खुलकर विरोध भी नहीं कर रही है।

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जातिगत जनगणना पर राजनीति

क्या है जातिगत जनगणना

देश में वैसे तो 1860 से जनगणना हो रही है। और उस समय से साल 1931 तक जातिगत जनगणना भी होती थी। लेकिन आजादी के बाद से जनगणना में केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति की ही जातियों के रुप में अलग से जनगणना की जाती रही है। जबकि ओबीसी जातियों की जनगणना अलग से नहीं की गई। लेकिन अब यह मांग उठने लगी है कि देश में ओबीसी की भी गणना की जाय। जिससे कि सही स्थिति का अंदाजा लग सके। ऐसे में सवाल उठता है कि केंद्र में बैठी भाजपा क्यों जातिगत जनगणना नहीं चाहती है।

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