नकद सहायता, लंबी कतारें और चुनावी माहौल...क्या बंगाल की 'युवा साथी' योजना बनेगी ममता बनर्जी के लिए गेमचेंजर?

इस सप्ताह राज्य भर में हजारों बेरोजगार युवा योजना के लिए पंजीकरण कराने पहुंचे। इनमें फिजिक्स और गणित में स्नातकोत्तर डिग्रीधारक, इंजीनियरिंग स्नातक, कंप्यूटर साइंस और रसायन विज्ञान के छात्र से लेकर 10वीं कक्षा तक पढ़े युवा भी शामिल थे। क्यों युवा बेरोजगार इस योजना की तरफ आकर्षित हो रहे हैं जानिए।

West Bengal Yuva Sathi scheme: पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बेरोजगार युवाओं के लिए शुरू की गई युवा साथी नकद सहायता योजना ममता बनर्जी के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इस योजना के तहत विद्यालयों और सामुदायिक भवनों के बाहर नामांकन शिविर खुलने से पहले ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं। बड़ी संख्या में स्त्री-पुरुष प्रमाणपत्रों और बैंक विवरण के साथ आवेदन करने पहुंच रहे हैं। सरकार के इस योजना को लागू करने की शुरुआत करते ही शिक्षित बेरोजगार युवा एक कल्याणकारी योजना के तहत 1,500 रुपये प्रति माह पाने के लिए कतारों में खड़े नजर आए। यह योजना 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक प्रमुख मुद्दा बनती जा रही है, जिसके अगले दो महीनों में होने की संभावना है।

yuva sathi

पश्चिम बंगाल सरकार की युवा साथी स्कीम

हजारों बेरोजगार युवा पंजीकरण कराने पहुंचे

इस सप्ताह राज्य भर में हजारों बेरोजगार युवा योजना के लिए पंजीकरण कराने पहुंचे। इनमें फिजिक्स और गणित में स्नातकोत्तर डिग्रीधारक, इंजीनियरिंग स्नातक, कंप्यूटर साइंस और रसायन विज्ञान के छात्र से लेकर 10वीं कक्षा तक पढ़े युवा भी शामिल थे। इस महीने अंतरिम बजट में घोषित इस योजना के तहत 21 से 40 वर्ष के बेरोजगार युवाओं को पांच साल तक या नौकरी मिलने तक हर महीने 1,500 रुपये दिए जाएंगे। हालांकि, योजना की शुरुआत अगस्त में होनी थी लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे एक अप्रैल से लागू कर दिया। चुनाव नजदीक होने के कारण इस कदम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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