12 फरवरी 2023 को राष्ट्रपति ने कुछ नए चेहरों को राज्यपाल बनाया तो कुछ के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया। इन नए चेहरों में भगत सिंह कोश्यारी का नाम चर्चा में है। महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से उन्होंने इस्तीफा दिया और उनकी जगह झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस को कमान दी गई है। कोश्यारी के इस्तीफे के बाद राजनीतिक दल खासतौर पर शिवसेना की तरफ से प्रतिक्रिया आई जिसमें आदित्य ठाकरे से लेकर संजय राउत ने भी टिप्पणी की। इसके साथ ही साथ एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने भी प्रतिक्रिया दी। अब सवाल यह है कि बीएस कोश्यारी के इस्तीफे से ये नेता खुश क्यों हैं।
भगत सिंह कोश्यारी, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल
शिवसेना उद्धव कैंप का बयान
आदित्य ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र की बड़ी जीत!महाराष्ट्र विरोधी राज्यपाल का इस्तीफा आखिरकार मंजूर!छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले, हमारे संविधान, विधानसभा और लोकतांत्रिक आदर्शों का लगातार अपमान करने वाले को राज्यपाल के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है!
Big win for Maharashtra! The resignation of anti Maharashtra Governor has finally been accepted!He, who constant… t.co/YGvn2ZgVo0
— ANI (@ANI) Feb 12, 2023
संजय राउत ने कहा कि राज्यपाल बदलना महाराष्ट्र पर एहसान नहीं है, कई राज्यपाल बदले गए हैं। एक साल हो गया है जब महाराष्ट्र के लोग शिवाजी महाराज और सावित्रीबाई फुले पर उनकी (बीएस कोश्यारी) टिप्पणी के कारण राज्यपाल बदलने की मांग कर रहे थे।
Changing the Governor isn't a favour to Maharashtra, many Governors have been changed. It's been a year since the p… t.co/U3efjbIlIp
— ANI (@ANI) Feb 12, 2023
क्या कहते हैं जानकार
अब सवाल यह है कि शिवसेना की तरफ से ऐसा बयान क्यों आया। इसके बारे में जानकार कहते हैं कि जिस तरह से भगत सिंह कोश्यारी मे महाराष्ट्र के मुद्दे पर वहां के विभुतियो के मुद्दे पर बयान दिए थे उससे बीजेपी भी खुद को सहज नहीं पा रही थी। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर हमलावर था कि बीजेपीको वोट की चिंता तो रहती है लेकिन महाराष्ट्र और मराठी समाज से लेना देना नहीं है। हाल ही के पंचायत चुनाव के जो नतीजे आये या एमएलसी के जो नतीजे आये उससे पार्टी को लगा कि भगत सिंह कोश्यारी के मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो परिणाम बेहतर नहीं होंगे। लिहाजा उनका बदला जाना जरूरी है। अब सिर्फ महाराष्ट्र के राज्यपाल को बदला जाता तो संदेश गलत जाता। लिहाजा समय का इंतजार किया गया और उनकी जगह रमेश बैस को कमान दे दी गई।
