DTC vs MAITC: चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद में दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं। अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘Envelope’ यानी लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है। इस गुट को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के तौर पर माना जाएगा। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Football Player’ यानी फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। इस गुट को भी पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल माना जाएगा।
TMC विवाद: दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित (फाइल फोटो- PTI)
यह व्यवस्था 17 सितंबर के उस अंतरिम आदेश के बाद की गई है, जिसमें दोनों गुटों को ‘All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Flowers & Grass’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया गया था।
होने वाले उपचुनावों पर भी स्थिति स्पष्ट
आयोग ने रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों और असम की नगांव लोकसभा सीट पर नामांकन दाखिल कर चुके उम्मीदवारों की स्थिति भी स्पष्ट की है। अरूप रॉय के Form-B से दाखिल नामांकन वाले उम्मीदवारों को ‘Democratic Trinamool Congress’ और ‘Envelope’ चिन्ह के साथ माना जाएगा, जबकि ममता बनर्जी के Form-B वाले उम्मीदवार ‘Mamata All India Trinamool Congress’ और ‘Football Player’ चिन्ह के साथ माने जाएंगे। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि नामांकन की बाकी वैधानिक शर्तों की जांच संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर करेंगे।
तीन सीटों पर सीधे लागू होगा आज का आदेश
आदेश का तत्काल असर पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों तथा असम की नगांव लोकसभा सीट पर पड़ेगा। इन सीटों पर दोनों गुटों के नाम से नामांकन दाखिल हुए थे, इसलिए आयोग ने उम्मीदवारों के नामांकन और चुनाव चिन्ह को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
आयोग ने नामांकन की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया
यह बारीकी भी महत्वपूर्ण है। आयोग ने सिर्फ यह तय किया है कि संबंधित उम्मीदवार किस गुट के नाम और चिन्ह के तहत माने जाएंगे। नामांकन की बाकी वैधानिक शर्तों की जांच रिटर्निंग ऑफिसर करेंगे। आयोग ने साफ किया है कि उसने इन नामांकन पत्रों की वैधता पर इससे आगे कोई राय नहीं दी है। चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा- अगर आज अंतरिम व्यवस्था नहीं करते तो एक ही पार्टी के नाम से उतरे दोनों गुटों के उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने का खतरा था, इसलिए लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव के लिए दोनों को अलग नाम-चिन्ह दिया गया।”
