पंजाब में नशे के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। 18 सितंबर से शुरू होने वाली ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ से ठीक एक दिन पहले पंजाब बीजेपी ने चंडीगढ़ में नशे से प्रभावित परिवारों को सामने लाकर अपनी मुहिम का फोकस साफ कर दिया। बीजेपी का कहना है कि नशे की समस्या सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करने वाला संकट है।
चंडीगढ़ में ये तस्वीरें पंजाब के उन परिवारों की हैं, जिनकी जिंदगी नशे की वजह से प्रभावित हुई है।किसी परिवार ने अपना बेटा खोया…किसी के घर का कमाने वाला नशे की गिरफ्त में चला गया… तो किसी मां-बाप ने अपने बच्चे को नशे से बाहर निकालने के लिए इलाज के लंबे दौर का सामना किया।
बीजेपी का आरोप है कि पंजाब में नशे का संकट परिवारों को तोड़ रहा है
ऐसी ही कहानी अबोहर की रहने वाली अमनप्रीत कौर की जिसके भाई लवप्रीत की 14 सितंबर को नशे की ओवरडोज से मौत हुई का कहना कि जब वो इसकी शिकायत लेकर थाने पहुंची तो पुलिस वालों ने कहा कि आप जाकर वहां नशा खरीदो तब हम उन्हें पकड़ेंगे।बीजेपी का आरोप है कि पंजाब में नशे का संकट परिवारों को तोड़ रहा है चंडीगढ़ से लेकर पंजाब के अलग-अलग जिलों तक बीजेपी नशे के मुद्दे को लेकर अभियान की तैयारी कर चुकी है।
चार यात्राओं के जरिए 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने का लक्ष्य है। लेकिन इस पूरे अभियान की सबसे अहम तस्वीर यह नशे से प्रभावित परिवार अब सिर्फ दर्शक नहीं रहेंगे, बल्कि उनकी आपबीती को राजनीतिक मंच पर भी जगह दी जाएगी। पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल ढिल्लों ने कहा हम पंजाब का दर्द बयां कर रहे हैं। प्रभावित परिवार यहां मौजूद हैं किसी ने अपना बेटा किसी ने अपना पति नशे के चलते खो दिया।पंजाब के जगराओं में एक ही परिवार के 6 सदस्य नशे की भेंट चढ़ गए हैं। इसलिए नशे को खत्म करने के लिए हम अपनी यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने 2 साल में नशा खत्म करने का ऐलान किया है।
'तब इन्होने कोई कार्यवाही क्यों नहीं की तब कोई यात्रा क्यों नहीं निकाली'
वहीं आम आदमी पार्टी महासचिव बलतेज सिंह पन्नू ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि2007 से 2017 तक जिन लोगों की डेथ हुई उन परिवारों को सामने लाया जाए की वो किस हालत में अब हैं अभी जो लोगो को सामने ले कर आ रहे हैं वो सिर्फ़ ध्यान भटकाने के लिए है।अब पंजाब सरकार नशे को रोकने के जिस लेवल पर युद्ध नशे विरुद्ध चल रहा है और काफ़ी हद तक कामयाब हो चुके है और हम कंट्रोल कर भी लेंगे। 2007 से लेकर 2017 तक पंजाब में इनकी ही सरकार थी 2014 में केंद्र में भी इनकी सरकार आ गई थी तब इन्होने कोई कार्यवाही क्यों नहीं की तब कोई यात्रा क्यों नहीं निकाली तब अपने कमरों में बैठे रहे ।
