Bihar, Bihar Hooch Tragedy: बिहार में जहरीली शराब से हाल ही में हुई मौतों के बाद राजनीति गरमा गई है। NHRC ने इस संबंध में बिहार सरकार को नोटिस जारी किया है। नोटिस को राजनीतिक दुर्भावना और गैर बीजेपी शासित राज्यों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए पूरे विपक्ष ने आज राज्यसभा से वॉकआउट किया। विपक्ष का आरोप है की सीबीआई, ईडी की तरह मोदी सरकार अब गैर बीजेपी राज्यों के खिलाफ एनएचआरसी का दुरुपयोग कर रही है।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)
विपक्ष की तरफ से सदन का वॉकआउट करने के बाद विपक्ष का एक प्रतिनिधिमंडल संसद में मीडिया के सामने अपना पक्ष रखने सामने आया है। कांग्रेस के नासिर हुसैन ने कहा की मोदी सरकार विपक्षी राज्यों को जानबूझ कर टारगेट कर रहे हैं। जबकि इसी तरह की घटना जब दूसरे राज्यों में होती है तो एनएचआरसी चुप्पी साधे रहता है। राजद के मनोज झा ने आरोप लगाया की जब इसी तरह की घटना मध्यप्रदेश और हरियाणा में होता है तो NHRC नोटिस नही भेजती है। उन्होंने कहा की विपक्ष अब सहकारी संघवाद को स्वीकार नही करेगा।
जेडीयू के रामनाथ ठाकुर ने समर्थन के लिए विपक्ष की दलों को बधाई दी। उनका कहना था की विपक्ष की एकता और एकाग्रता ही मोदी सरकार के तानशाही प्रवृति से लड़ने में कारगर साबित होगा। वही TMC की डोला सेन जिन्होंने अपने जीरो आवर में बिहार का मुद्दा उठाया उनका कहना था की NHRC उत्तरप्रदेश, गुजरात के मोरबी में नही जाते, उन्हे सिर्फ बिहार और बंगाल पसंद है। उन्होंने कहा की जब विपक्षी सांसदों का रुल 267 में नोटिस को सभापति ने खारिज कर दिया तब उन्होंने अपने समय में बिहार का मुद्दा उठाया।
पिछले दो दिनों से राज्यसभा में विपक्ष किसी न किसी मुद्दे पर वॉकआउट कर अपनी एकता दिखाने का प्रयास कर रहा है। बिहार में जहरीली शराब से हुई मौत और शराबबंदी को लेकर अब नए सिरे से बहस छिड़ चुकी है। बिहार से लेकर संसद तक बीजेपी इसे नीतीश सरकार की नाकाम नीति बताते हुए हमलावर है। वही विपक्ष एनएचआरसी के नोटिस को राजनीतिक प्रतिसोध बता रही है।
