'वीआईपी हो या आम आदमी, सबके लिए एक ही कानून', बद्रीनाथ चंदा चोरी मामले में संतों ने खोला मोर्चा

Badrinath Temple Donation Theft Case: बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति में सामने आई चंदा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर संतों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा है। हरिद्वार के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

Badrinath Temple Donation Theft Case: उत्तराखंड के पवित्र चार धामों में से एक, बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में वित्तीय गड़बड़ियों और चंदे की चोरी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब संतों और राजनेताओं ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। हरिद्वार के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज (Swami Kailashanand Giri Maharaj) और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति (Sadhvi Niranjan Jyoti NCBC chairperson) ने साफ शब्दों में कहा है कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

Swami Kailashanand NCBC chairperson Sadhvi Niranjan Jyoti

बद्रीनाथ मंदिर घोटाला

स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गठित विशेष जांच टीम पर पूरा भरोसा जताया। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी मांग दोहराते हुए कहा कि देश के मंदिरों को सरकारी प्रशासनिक नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि मंदिरों का प्रबंधन आध्यात्मिक गुरुओं, सच्चे भक्तों और स्वतंत्र ट्रस्टों के हाथों में होना चाहिए।

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