AUSTRAHIND 2026: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रहे बड़े सैन्य अभ्यास AUSTRAHIND 2026 में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन पहुंचे। यह अभ्यास केरल के तिरुवनंतपुरम में फॉरेन ट्रेनिंग नोड पर चल रहा है। हाई कमिश्नर ने यहां भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई जवानों से मुलाकात की और अभ्यास को देखा। इस मौके पर हाई कमिश्नर ने भारत की तारीफ करते हुए उसे एक प्रमुख सुरक्षा साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में भारत का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया सैन्य अभ्यास (फोटो साभार- TNN)
AUSTRAHIND 2026 का 5वां संस्करण
भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों हिंद महासागर से जुड़े हैं, खासकर पूर्वी हिंद महासागर दोनों देशों को जोड़ने का काम करता है। इसलिए इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए दोनों देशों का साथ आना बहुत जरूरी है। फिलिप ग्रीन ने कहा कि दुनिया में अब सुरक्षा की चुनौतियां बदल गई हैं। जमीन, हवा, समुद्र के साथ-साथ साइबर और दूसरी जगहों से भी खतरे आ रहे हैं। ऐसे में भारत और ऑस्ट्रेलिया को रक्षा के क्षेत्र में और ज्यादा मिलकर काम करना होगा। दोनों देशों का एक ही लक्ष्य है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र, खुला और शांतिपूर्ण बना रहे।
उन्होंने AUSTRAHIND जैसे संयुक्त अभ्यासों को बहुत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यासों से दो फायदे होते हैं। पहला, दोनों सेनाओं के बीच भरोसा और दोस्ती बढ़ती है। दूसरा, दोनों सेनाएं एक-दूसरे की रणनीति और हथियारों को समझती हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर वे साथ मिलकर बेहतर तरीके से ऑपरेशन कर सकती हैं।
क्या है AUSTRAHIND 2026 अभ्यास?
AUSTRAHIND 2026 भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाला 5वां संयुक्त सैन्य अभ्यास है। यह अभ्यास 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक चलेगा। इस अभ्यास में भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के करीब 120-120 जवान हिस्सा ले रहे हैं। भारत की तरफ से गढ़वाल राइफल्स के जवानों की टुकड़ी आई है, जिसमें अन्य यूनिट के जवान भी शामिल हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया की तरफ से 13 ब्रिगेड के जवान इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। इस अभ्यास का पिछला संस्करण यानी चौथा संस्करण पिछले साल 2025 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में इरविन बैरक में हुआ था।
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क्या है इस बार की थीम
AUSTRAHIND 2026 की इस बार अभ्यास की थीम रखी गई है- "संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत द्वीप और तटीय इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त अभियान"। इसके तहत जवानों को तटीय और द्वीप वाले इलाकों में कैसे ऑपरेशन करना है, इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें हवाई और समुद्री ऑपरेशन, दुश्मन पर नजर रखना, जरूरी ठिकानों की सुरक्षा करना और आपदा के समय लोगों की मदद करना जैसे अभ्यास शामिल हैं। दोनों देशों के जवान अपने अनुभव भी एक-दूसरे से साझा करेंगे। इस बार एक खास बात यह भी है कि पहली बार न्यूजीलैंड का एक ऑब्जर्वर दल भी इस अभ्यास को देखने आया है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि AUSTRAHIND 2026 से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सैन्य सहयोग और मजबूत होगा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की दोनों देशों की साझा कोशिश को बल मिलेगा।
