Himanta Biswa Sarma: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को दावा किया कि 2027 की जनगणना में असमिया समुदाय लगभग अल्पसंख्यक हो जाएगा। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सीएम सरमा ने यह भी कहा कि वे बहुत ही अंधकारमय समय में राजनीति में हैं। उन्होंने सदन को बिना विस्तार से बताए कहा कि 2027 की जनगणना के दौरान, असमिया समुदाय लगभग अल्पसंख्यक हो जाएगा।
असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का दावा
सिर्फ एक दीपक ही प्रकाश और साहस दे रहा है
उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार उस दीपक को जीवित रखने की कोशिश कर रही है, जो सभी को साहस दे रहा है। उन्होंने कहा, आज धुबरी और माजुली के लोग मुझे फोन करके कहते हैं, 'मैं सुरक्षित हूं'। हम अल्पसंख्यक बनने की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन सिर्फ एक दीपक ही प्रकाश और साहस दे रहा है।
सरमा पहले भी कई मौकों पर दावा कर चुके हैं कि अगर वर्तमान जन्म दर जारी रही तो 2041 तक असम में मुसलमानों की आबादी लगभग हिंदुओं के बराबर हो जाएगी। 2011 की जनगणना के अनुसार, असम में कुल मुस्लिम आबादी 1.07 करोड़ थी – जो राज्य के 3.12 करोड़ निवासियों का 34.22 प्रतिशत थी। जनगणना में यह भी दिखाया गया कि असम में 1.92 करोड़ हिंदू थे।
भाजपा ने जनसांख्यिकीय बदलावों के मुद्दे को उठाया
भाजपा राज्य में जनसांख्यिकीय बदलावों को लगातार उजागर करती रही है और दावा करती रही है कि 2011 की जनगणना के अनुसार कम से कम नौ जिले मुस्लिम बहुल हो गए, जबकि 2001 में यह संख्या छह थी। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर कम से कम 11 हो गई है, हालांकि 2021 में कोई जनगणना नहीं हुई थी।
असम में मुस्लिम बहुल जिले बढ़ गए
2001 में जब असम में 23 जिले थे, तब छह जिलों में मुस्लिम बहुल थे – धुबरी (74.29 प्रतिशत), गोलपारा (53.71 प्रतिशत), बारपेटा (59.37 प्रतिशत), नागांव (51 प्रतिशत), करीमगंज (52.3 प्रतिशत) और हैलाकांडी (57.63 प्रतिशत)। 2011 में जिलों की संख्या बढ़कर 27 हो गई और उनमें से नौ जिलों में मुस्लिम बहुसंख्यक थे - धुबरी (79.67 प्रतिशत), गोलपारा (57.52 प्रतिशत), बारपेटा (70.74 प्रतिशत), मोरीगांव (52.56 प्रतिशत), नागांव (55.36 प्रतिशत), करीमगंज (56.36 प्रतिशत), हैलाकांडी (60.31 प्रतिशत), बोंगाईगांव (50.22 प्रतिशत) और दरांग (64.34 प्रतिशत)।
