भागवत के 'सनातन ज्ञान' पर भड़के 'भाईजान', बोले- वो कौन होते हैं मुस्लिमों को भारत में रहने की इजाजत देने वाले

  • Authored by: किशोर जोशी
  • Updated Jan 12, 2023, 07:08 AM IST

Asaduddin Owaisi on Mohan Bhagwat: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस विवादित साक्षात्कार को लेकर उन पर निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि मुसलमानों को या इस्लाम को देश में कोई खतरा नहीं है, लेकिन उसे ‘हम बड़े हैं’ का भाव छोड़ना पड़ेगा।

New Delhi: संघ प्रमुख (RSS) मोहन भागवत के ताजा बयान से सियासी घमासान मचा हुआ है। संघ प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने अपने बयान को कहा था कि भारत में मुस्लिमों को डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। इस्लाम को कोई खतरा नहीं है लेकिन उन्हें अपनी श्रेष्ठता को लेकर बड़बोले बयानबाजी निश्चित ही छोड़ देनी चाहिए। जिसपर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) तिलमिला उठे और उन्होंने मोहन भागवत के बयान पर पलटवार किया। इसके अलावा भी उन्होंने भागवत के कई बयानों का जवाब भी दिया।

asaduddin owaisi

ओवैसी ने मोहन भागवत पर किया तीखा हमला

ओवैसी का तीखा हमला

ओवैसी ने कहा कि कि भागवत अपनी टिप्पणी से सीधे तौर पर लोगों को 'मुसलमानों के खिलाफ हिंसा' करने के लिए उकसा रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए, AIMIM प्रमुख ने कहा,'मुस्लिम केवल समानता और समान नागरिकता की बात कर रहे हैं, वर्चस्व की नहीं। उनके (RSS) लिए, विविधता राष्ट्र-विरोधी है। वह (मोहन भागवत) सीधे लोगों को मुसलमानों के खिलाफ हिंसा करने के लिए उकसा रहे हैं। वह महंगाई, बेरोजगारी, भारत-चीन और रुपये की कीमत पर कभी नहीं बोलेंगे।'

भागवत ने कही थी ये बात

इस सप्ताह की शुरुआत में, मोहन भागवत ने आरएसएस के मुखपत्र माने जाने वाले ऑर्गनाइज़र और पाञ्चजन्य को दिए अपने साक्षात्कार दिया था जिसके बाद एक राजनीतिक तूफान आ गया। साक्षात्कार में, उन्होंने कहा, "सरल सत्य यह है - हिंदुस्तान को हिंदुस्तान ही रहना चाहिए। हमारा मुस्लिम समुदाय सुरक्षित है। आज के भारत में उन्हें कोई नुकसान नहीं है। अगर वे अपनी आस्था पर टिके रहना चाहते हैं, तो वे कर सकते हैं। यदि वे अपने पूर्वजों के विश्वास पर लौटना चाहते हैं, तो वे कर सकते हैं। यह पूरी तरह से उनकी पसंद है। हिंदुओं में ऐसी कोई ज़िद नहीं है। इस्लाम को डरने की कोई बात नहीं है। लेकिन हम बड़े हैं, हम एक समय राजा थे, हम फिर से राजा बने...यह छोड़ना पड़ेगा और किसी कोई भी छोड़ना पड़ेगा।' भागवत की टिप्पणी ने कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) से भी तीखी आलोचना की थी और इसे संविधान विरोधी बताया था।

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