आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 (20% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना पर्याप्त अध्ययन किए E20 पेट्रोल को लोगों पर थोप दिया है, जिससे वाहनों के प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है।
E20 पेट्रोल पर केजरीवाल का बड़ा हमला, बोले- 'बिना रिसर्च लोगों पर थोपी गई नीति, गाड़ियों का घट रहा माइलेज'। AI IMAGE
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि सरकार के अलग-अलग मंत्रालय E20 पेट्रोल के प्रभाव को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "कभी कहा जाता है कि E20 अच्छा है, तो कभी कहा जाता है कि यह खराब है। एक मंत्रालय कहता है कि इससे 2 से 5 प्रतिशत का फर्क पड़ता है, जबकि दूसरा मंत्रालय 4 प्रतिशत की बात करता है। इसका मतलब है कि कोई ठोस अध्ययन ही नहीं किया गया।"
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल के कारण वाहनों का माइलेज कम हो रहा है और इंजन को भी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इससे लोगों को नुकसान हो रहा है, तो सरकार इसे लागू करने पर इतनी जोर क्यों दे रही है। उन्होंने कहा, "सरकार लोगों पर इसे जबरन क्यों थोप रही है? आखिर इसमें सरकार का क्या हित है? E20 पेट्रोल अच्छा नहीं है।"
ई 20 को लेकर क्या है विपक्ष का तर्क
हाल के दिनों में E20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार इस नीति पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और प्रदूषण घटाने में भी मदद मिलेगी। फिलहाल, E20 पेट्रोल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
ई20 के बचाव में सरकार ने क्या कहा?
ई20 पेट्रोल लाने के पीछे सरकार का उद्देश्य कई अहम लक्ष्यों को हासिल करना है। इसका सबसे बड़ा मकसद कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना है, ताकि विदेशी तेल पर खर्च घटाया जा सके।
इसके साथ ही सरकार गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ाकर किसानों की आय में इजाफा करना चाहती है। E20 को कार्बन उत्सर्जन और वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इसके अलावा, कम तेल आयात होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
