Election Commission Row: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर आयुक्तों की असहमति की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी तत्काल गिरफ्तारी और देश में जारी पूरे SIR अभियान को रद्द करने की मांग की है।
SIR विवाद में AAP का सीधा प्रहार (फोटो: X/@ArvindKejriwal)
अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग को अपनी मनमर्जी से चला रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई महीनों से चुनाव आयोग की कोई आधिकारिक बैठक ही नहीं हुई और ज्ञानेश कुमार खुद ही फैसले लेते रहे।
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13 करोड़ मतदाताओं के काटे नाम-केजरीवाल
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि देश भर में SIR प्रक्रिया के तहत जो करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वह पूरी तरह से गैर-कानूनी है क्योंकि इसे आयोग की आधिकारिक मंजूरी हासिल नहीं थी। उन्होंने मांग रखी कि SIR के तहत किए गए सभी बदलाव निरस्त किए जाएं और तीन साल पुरानी मतदाता सूची को फिर से बहाल किया जाए। केजरीवाल ने CEC पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने तक की बात कह डाली।
मुख्य चुनाव आयुक्त दें इस्तीफा-मनीष सिसोदिया
इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने वीडियो संदेश जारी कर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। वहीं, राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल के चुनाव धांधली से जीते गए हैं और इन्हें तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए।
देश के युवा और विपक्षी दल सड़कों पर उतरे- सौरभ भारद्वाज
आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने देश के युवाओं और विपक्षी दलों से चुनाव आयोग की इस मनमानी के खिलाफ एक जुट होकर सड़कों पर संवैधानिक तरीके से आवाज उठाने की अपील की। हालांकि, इन तमाम गंभीर आरोपों के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि SIR समेत ECI के सभी फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) तथा मुख्य चुनाव आयुक्त की सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं।
