गृह मंत्री अमित शाह ने आज भारत के सीमा प्रबंधन तंत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) ‘विनिमय’ का शुभारंभ किया। यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है,जिसे देश के सभी लैंड पोर्ट्स के संचालन को अधिक प्रभावी,पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
अमित शाह।
गृह मंत्रालय ने इसे लेकर एक बयान भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि एलपीएमएस विभिन्न एजेंसियों और हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा। इस प्रणाली के माध्यम से सीमा शुल्क (कस्टम्स),आव्रजन (इमिग्रेशन),सीमा सुरक्षा बलों और अन्य संबंधित विभागों के बीच लॉजिस्टिक्स एवं नियामकीय सूचनाओं का सुरक्षित और रियल-टाइम आदान-प्रदान संभव होगा। इससे सीमा पार व्यापार और यात्रियों की आवाजाही की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम और तेज हो सकेगी।
सरकार का कहना है कि यह पहल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है। अब लैंड पोर्ट्स को भी एयरपोर्ट और सीपोर्ट की तरह आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिससे सीमा क्षेत्रों में परिचालन क्षमता बढ़ेगी और प्रक्रियाओं में लगने वाला समय कम होगा।
LPMS (लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम) की प्रमुख खासियतें
- एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म- लैंड पोर्ट्स से जुड़े सभी प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाता है।
- रियल-टाइम डेटा शेयरिंग- कस्टम्स, इमिग्रेशन, सीमा सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियों के बीच सुरक्षित एवं त्वरित सूचना आदान-प्रदान।
- एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो - कार्गो और यात्रियों की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होगी।
- स्लॉट बुकिंग सुविधा- वाहनों और कार्गो के लिए अग्रिम स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था।
- ऑनलाइन भुगतान प्रणाली- शुल्क और अन्य भुगतान डिजिटल माध्यम से किए जा सकेंगे।
- ट्रैकिंग सिस्टम- कार्गो, वाहनों और प्रक्रियाओं की रियल-टाइम निगरानी।
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस - विभिन्न मंजूरियों और औपचारिकताओं के लिए एकीकृत व्यवस्था।
यह स्लॉट बुकिंग,ऑनलाइन भुगतान,माल और वाहनों की ट्रैकिंग तथा सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इससे व्यापारियों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और सरकारी एजेंसियों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया एकीकृत रूप से संचालित हो सकेगी।
यह नया प्लेटफॉर्म देश के प्रमुख डिजिटल नेटवर्क जैसे इंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज गेटवे (ICEGATE), यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) और मोटर व्हीकल इकोसिस्टम के साथ भी जुड़ा हुआ है। इससे विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करने की प्रक्रिया आसान होगी और सीमा प्रबंधन अधिक पारदर्शी तथा दक्ष बन सकेगा।
भारत के ‘विकसित भारत 2047’ विजन का भी हिस्सा
गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि एलपीएमएस केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि भारत के ‘विकसित भारत 2047’ विजन का भी हिस्सा है। इसके जरिए सीमा पार व्यापार को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है।
गौरतलब है कि लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया गृह मंत्रालय के बॉर्डर मैनेजमेंट विभाग के तहत कार्य करने वाली एक वैधानिक संस्था है, जो देश के लैंड पोर्ट्स के विकास और संचालन की जिम्मेदारी संभालती है। वर्तमान में यह भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर स्थित 15 लैंड पोर्ट्स का संचालन कर रही है, जिनके माध्यम से पड़ोसी देशों के साथ व्यापार, आवागमन और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाता है।
वर्तमान में एलपीएआई भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर 15 लैंड पोर्ट्स का संचालन करती है। इनमें भारत-पाकिस्तान सीमा पर अटारी (पंजाब) और डेरा बाबा नानक (पंजाब); भारत-नेपाल सीमा पर रुपईडीहा (उत्तर प्रदेश), रक्सौल (बिहार) और जोगबनी (बिहार); भारत-भूटान सीमा पर दरंगा (असम); भारत-बांग्लादेश सीमा पर पेट्रापोल (पश्चिम बंगाल), डाकी (मेघालय), सुतारकांडी, गोलकगंज और मनकाचर (असम), अगरतला, श्रीमंतपुर और सबरूम (त्रिपुरा); और भारत-म्यांमार सीमा पर मोरेह (मणिपुर) शामिल हैं।
