Air India Plane Crash Ahmedabad: अहमदाबाद विमान हादसे को एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन उस दिन राहत और बचाव कार्य में जुटे फायरकर्मियों के जेहन से वह भयावह मंजर आज भी नहीं मिटा है। हादसे के दौरान सबसे पहले मौके पर पहुंची नरोडा फायर स्टेशन की टीम में शामिल फायर अधिकारी सुधीर गढ़वी ने उस दिन की यादें साझा करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे यह घटना अभी कुछ दिन पहले ही हुई हो।
अहमदाबाद विमान हादसे को लेकर सबसे पहले पहुंचे फायर फाइटर ने बयां किया अपना दर्द।
सुधीर ने बताया कि हादसे वाले दिन उनकी टीम नियमित ड्यूटी के बाद भोजन कर रही थी। तभी उन्होंने दूर आसमान में धुएं का विशाल गुबार उठता देखा। आधिकारिक कॉल आने से पहले ही फायरकर्मी सतर्क हो गए और वाहन लेकर निकल पड़े। इसी दौरान एयरपोर्ट की हॉटलाइन से सूचना मिली कि मेघाणीनगर क्षेत्र में विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है।
विमान में लगी थी जबरदस्त आग
उन्होंने बताया कि करीब 28 से 30 फायरकर्मियों और पांच दमकल वाहनों के साथ उनकी टीम घटनास्थल पर पहुंची। वहां पहुंचते ही उन्होंने देखा कि विमान में लगी आग विकराल रूप ले चुकी थी। एयरपोर्ट फायर ब्रिगेड आग बुझाने में जुटी थी, जबकि स्थानीय लोगों ने बताया कि पास के डॉक्टर हॉस्टल और मेस में कई लोग फंसे हुए हैं।
इसके बाद बचाव कार्य को दो हिस्सों में बांटा गया। एक टीम आग पर काबू पाने में जुटी, जबकि दूसरी टीम इमारतों में फंसे लोगों को निकालने के लिए अंदर गई। सुधीर के अनुसार, अंदर का दृश्य बेहद भयावह था। कई लोग घायल अवस्था में पड़े थे, जबकि कई लोगों की मौत हो चुकी थी। विमान का ईंधन इमारतों से टकराने के कारण तीसरी और चौथी मंजिल पर सबसे ज्यादा तबाही हुई थी। फायर अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल पर बिखरे शवों को देखकर पूरी टीम स्तब्ध रह गई थी। शुरू में उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि विमान में इतने अधिक यात्री सवार थे। बाद में जब स्थिति स्पष्ट हुई तो हादसे की गंभीरता का एहसास हुआ।
शवों की तलाश का काम छह दिनों तक चला
उन्होंने कहा कि राहत और बचाव अभियान केवल पहले दिन तक सीमित नहीं रहा। मलबा हटाने और शवों की तलाश का काम पांच से छह दिनों तक चला। कैंटीन, हॉस्टल और विमान के विभिन्न हिस्सों से लगातार शव और मानव अवशेष बरामद होते रहे। दूसरे दिन विमान के टेल सेक्शन से एक एयर होस्टेस का शव भी मिला था।
सुधीर ने बताया कि उस दिन सबसे बड़ी चुनौती भीषण गर्मी, ईंधन से उत्पन्न अत्यधिक तापमान और लगातार मानसिक दबाव था। कई फायरकर्मी डिहाइड्रेशन और थकावट का शिकार हो गए थे, लेकिन लोगों को बचाने की प्राथमिकता के कारण सभी बिना रुके काम करते रहे।
जब सुधीर ने देखा था फ्लाइट के अंदर का खौफनाक मंजर
एक साल बाद भी उस दिन की यादें उनके मन में ताजा हैं। उन्होंने कहा कि आज भी उन्हें वे दृश्य याद आते हैं, जहां कोई बच्चे को गोद में लिए था, किसी के हाथ में धार्मिक पुस्तक थी, तो किसी के पास लैपटॉप और फाइलें थीं। इन दृश्यों को याद कर आज भी आंखें नम हो जाती हैं।
फायर अधिकारी के अनुसार, हादसे के बाद पीड़ित परिवारों से उनकी कोई सीधी बातचीत नहीं हुई, लेकिन उस दिन जो कुछ उन्होंने देखा, उसका दर्द आज भी उनके मन में जिंदा है। अहमदाबाद विमान हादसा उनके करियर का सबसे बड़ा और सबसे दर्दनाक रेस्क्यू ऑपरेशन रहा।
