Rahul Gandhi: सजा के बाद खतरे में राहुल की संसद सदस्यता, 5 प्वाइंट में समझें क्या है राहत पाने का कानूनी विकल्प

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Mar 24, 2023, 07:21 AM IST

Rahul Gandhi’s conviction : जनप्रतिनिधि कानून में ऐसा प्रावधान है कि दो साल या उससे अधिक समय के लिए सजा होने पर विधायी कार्यों से जुड़े लोगों की सदस्यता को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यानी व्यक्ति सजा पूरी करने के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। इससे राहुल गाधी की संसद सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा है।

Rahul Gandhi’s conviction : मानहानि के एक मामले में गुजरात की एक कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई। दरअसल, साल 2019 में कर्नाटक के कोलार में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल ने 'मोदी सरनेम' को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि 'क्या वजह है कि जितने भी भ्रष्टचारी हैं, उनका सरनेम मोदी है।' भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने राहुल के खिलाफ मानहानि का केस किया था। इस मामले की सुनवाई करने के बाद सूरत के सेशंस कोर्ट ने कांग्रेस नेता को दो साल की सजा सुनाई। कोर्ट में फैसला सुनाए जाते समय राहुल गांधी ने कहा कि वह दोषी नहीं हैं।

rahul gandhi

मानहानि मामले में राहुल गांधी को हुई दो साल की सजा।

संसद सदस्यता जाने पर लटक रही तलवार

कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 499 और 500 के तहत राहुल गांधी को दोषी करार दिया है। साथ ही उन्हें जमानत भी दी है। राहुल गांधी इन 30 दिनों में अपनी सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत जा सकते हैं। बता दें कि जनप्रतिनिधि कानून में ऐसा प्रावधान है कि दो साल या उससे अधिक समय के लिए सजा होने पर विधायी कार्यों से जुड़े लोगों की सदस्यता को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यानी व्यक्ति सजा पूरी करने के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। इससे राहुल गाधी की संसद सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, कानून के जानकारों का कहना है कि अगर अपीलीय अदालत राहुल गांधी की दोष सिद्धि और दो साल की सजा को निलंबित कर देती है, तो वह लोकसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य नहीं होंगे।

End of Feed