Adipurush Row: फिल्म आदिपुरुष के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने थोड़ा सख्त तेवर दिखाया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से दो टूक कहा कि लोग बार टॉप कोर्ट के पास पहुंच जाते हैं। क्या अब कोर्ट हर बात पर सुनवाई करेगा? फिल्मों और किताबों के लिए इन दिनों सहिष्णुता का स्तर गिरता जा रहा है।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)
दरअसल, अदालत में शुक्रवार (21 जुलाई, 2023) को विवादित फिल्म के सर्टिफिकेट को कैंसल करने के अनुरोध से जुड़ी जनहित याचिका दी गई थी। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि किसी पाठ्य सामग्री का सिनेमाई प्रदर्शन उसकी सटीक प्रतिकृति नहीं हो सकता।
जस्टिस एस.के.कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने कहा कि फिल्म को सेंसर बोर्ड से प्रमाणपत्र मिला है। अदालत के लिए इसमें हस्तक्षेप करना ठीक नहीं होगा। टॉप कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों पर अदालतों को सुनवाई नहीं करनी चाहिए।
पीठ के मुताबिक, ‘‘हमें भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई क्यों करनी चाहिए। हर कोई अब हर बात पर संवेदनशील हो जाता है। हर बार आप उच्चतम न्यायालय आ जाते हैं। क्या हम हर बात पर सुनवाई करें? फिल्मों, किताबों के लिए इन दिनों सहिष्णुता का स्तर गिरता जा रहा है।’’
यह याचिका वकील ममता रानी की ओर से दायर की गई थी। उन्होंने अपनी पीटिशन के जरिए पवित्र ग्रंथों को कथित तौर पर गलत तरह से प्रस्तुत करने के लिए फिल्म के प्रमाणपत्र को निरस्त करने का अनुरोध किया गया था। (पीटीआई इनपुट्स के साथ)
