World Organ Donation Day: किसी की जिंदगी खत्म होने के बाद भी उसके अंग किसी दूसरे इंसान के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बन सकते हैं। यही अंगदान की सबसे खास बात है। भारत में किडनी, लिवर और हृदय जैसे कई अंग दान किए जा सकते हैं। वहीं कॉर्निया, त्वचा और हड्डियों आदि जैसे ऊतक भी किसी जरूरतमंद के इलाज में काम आ सकते हैं। विश्व अंगदान दिवस इसी नेक पहल के प्रति लोगों को जागरूक करने और अंगदान के महत्व को समझाने का अवसर है।
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यानी बात सिर्फ एक अंग की नहीं है। एक दान कई लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के अनुसार, ब्रेन-स्टेम मृत्यु के बाद एक दाता के अंगों से आठ तक लोगों की जान बचाने की क्षमता हो सकती है और ऊतक कई अन्य लोगों की जिंदगी बेहतर बना सकते हैं।
दिल से लेकर लिवर तक, क्या-क्या हो सकता है दान?
अंगदान की बात आती है तो सबसे पहले किडनी का नाम याद आता है। लेकिन लिस्ट इससे काफी बड़ी है। मृत्यु के बाद चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त होने पर दोनों किडनी, लिवर, हृदय, दोनों फेफड़े, अग्न्याशय और आंत दान किए जा सकते हैं।
हर अंग किसी अलग जरूरतमंद मरीज के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी को किडनी की जरूरत हो सकती है, तो किसी दूसरे मरीज के लिए नया लिवर या हृदय जीवन बचाने वाला साबित हो सकता है।
सिर्फ अंग ही नहीं, ऊतक भी होते हैं जरूरी
यहां एक छोटी-सी लेकिन जरूरी बात समझना अच्छा है। अंग और ऊतक एक ही चीज नहीं होते, ऊतक मतलब टिशू होते हैं। कॉर्निया, त्वचा, हड्डियां, हृदय वाल्व, ब्लड वेसल्स, नस और टेंडन जैसे टिशू भी दान किए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल कई तरह के उपचार में किया जाता है। उदाहरण के लिए, कॉर्निया दान किसी व्यक्ति की रोशनी लौटाने में मदद कर सकता है, जबकि त्वचा का इस्तेमाल गंभीर जलने वाले मरीजों के इलाज में किया जा सकता है।
क्या जिंदा रहते भी अंगदान कर सकते हैं?
हां, लेकिन इसकी एक सीमा है। जीवित व्यक्ति कुछ खास अंग या उनके हिस्से ही दान कर सकता है। NOTTO के अनुसार, उपयुक्त मामलों में आप एक किडनी, लिवर का एक हिस्सा और अग्न्याशय का एक हिस्सा दान कर सकता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में फेफड़े या छोटी आंत का हिस्सा दान करना भी संभव हो सकता है।
अंगदान कोई सामान्य दान नहीं है। यह ऐसा फैसला है जिसमें किसी इंसान के जाने के बाद भी उसके शरीर का एक हिस्सा किसी दूसरे की जिंदगी में उम्मीद बन सकता है।
