क्या विदेशी हार्ट रिस्क कैलकुलेटर भारतीयों के लिए सही हैं, इंडियंस में क्यों ज्यादा आ रहा रिस्क, डॉक्टर से जानिए

Foreign Risk Calculator Not Accurate For Indian Heart Patients: क्या विदेशों में बने हार्ट रिस्क कैलकुलेटर क्या भारतीयों के लिए सही हैं? हाल ही में जी.बी. पंत अस्पताल के प्रोफेसर ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. मोहित गुप्ता ने ANI को दिए इंटरव्यू में चौंकाने वाली बात कही। उन्होंने बताया कि भारतीयों में हार्ट अटैक का खतरा अलग तरीके से बढ़ रहा है। चलिए जानते हैं क्यों कम उम्र में दिल की बीमारी बढ़ रही है और क्यों भारत के लिए अलग रिस्क कैलकुलेटर की जरूरत बताई जा रही है।

Foreign Risk Calculator Not Accurate For Indian Heart Patients: आज के समय में हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है। अब कम उम्र के लोग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है कि व्यक्ति देखने में फिट होता है, उसकी रिपोर्ट भी ठीक आती है, लेकिन फिर भी उसे हार्ट अटैक हो जाता है। दिल्ली के जी.बी. पंत अस्पताल के प्रोफेसर ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. मोहित गुप्ता ANI को दिए इंटरव्यू में बताया कि विदेशों में बने हार्ट रिस्क कैलकुलेटर भारतीयों के लिए हमेशा सटीक नहीं होते। भारत के लोगों की जीवनशैली, खान-पान, तनाव और शरीर की बनावट अलग है, इसलिए कई बार खतरा कम दिखता है, जबकि असल में जोखिम ज्यादा होता है।

विदेशी हार्ट रिस्क कैलकुलेटर भारतीयों के लिए सहीं या नहीं

विदेशी हार्ट रिस्क कैलकुलेटर भारतीयों के लिए सहीं या नहीं (PC- Ai)

भारतीयों में जल्दी क्यों आ रहा हार्ट अटैक

डॉ. मोहित गुप्ता के अनुसार भारतीयों में हार्ट अटैक पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में लगभग 10 साल पहले देखने को मिल रहा है। इसकी वजह सिर्फ एक नहीं है। हमारी रोजमर्रा की आदतें, बढ़ता तनाव, प्रदूषण, अनियमित दिनचर्या और जेनेटिक कारण मिलकर दिल पर असर डालते हैं। कई बार व्यक्ति बहुत ज्यादा मोटा भी नहीं होता, कोलेस्ट्रॉल भी बहुत ज्यादा नहीं होता, फिर भी अचानक हार्ट अटैक हो जाता है। यही वजह है कि अब दिल की बीमारी को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

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