क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रात को पूरे 7-8 घंटे की नींद लें, फिर भी सुबह जब अलार्म बजता है तो आँख खोलना मुश्किल लगता है? सिर एकदम भारी होता है, शरीर में सुस्ती भरी रहती है और मन करता है कि बस थोड़ा सा और सो लें। लोग सोचते हैं कि उनकी नींद पूरी नहीं हुई या अलार्म ने उनकी नींद खराब कर दी। हालांकि असल में इसके पीछे का कारण यह है कि अलार्म ने आपको किस तरह की नींद से जगाया है।
सुबह का अलार्म आपको पहुंचा सकता है नुकसान (Photo: iStock)
गहरी नींद और दिमाग का खेल
हमारी नींद कई अलग-अलग चरणों से होकर गुजरती है। इनमें सबसे अहम चरण होता है गहरी नींद जिसे साइंटिफिक भाषा में स्लो वेव स्लीप कहा जाता है। न्यूरोलॉजिस्ट्स के अनुसार, गहरी नींद वह समय होता है जब हमारा शरीर खुद की मरम्मत करता है, मांसपेशियां ठीक होती हैं और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
इस फेज में हमारी ब्रेन वेव्स बहुत धीमी हो जाती हैं, दिल की धड़कन और सांसें भी काफी शांत हो जाती हैं। अब सोचिए, जब दिमाग इतने शांत और गहरे आराम के मूड में हो और अचानक अलार्म की तेज आवाज बज उठे, तो दिमाग को तुरंत सतर्क होने में वक्त लगता है। इसी अवस्था को मेडिकल साइंस में स्लीप इनर्शिया कहा जाता है। यही वजह है कि अचानक उठने पर हमें चक्कर सा महसूस होता है, सुस्ती छाई रहती है और दिमाग सुन्न सा लगता है।
क्या अलार्म बजने से दिमाग को नुकसान पहुंचता है?
एक्सपर्ट्स साफ करते हैं कि अलार्म बजने से या गहरी नींद से अचानक टूटने पर दिमाग को कोई स्थाई नुकसान नहीं होता है। बस बात इतनी सी है कि दिमाग को एकदम शांत माहौल से पूरी तरह जागने में थोड़ा सा ट्रांज़िशन समय लगता है, जो हल्का सा परेशानी भरा या असहज महसूस हो सकता है। इसी तरह जब हम आरईएम स्लीप यानी सपनों वाली नींद से अचानक जागते हैं, तब भी हम थोड़ा भ्रमित महसूस कर सकते हैं।
सुबह तरोताज़ा उठने के लिए क्या करें?
अगर आप भी रोज सुबह सुस्ती और भारीपन से परेशान रहते हैं, तो इन आसान टिप्स को आजमा सकते हैं:
सोने और जागने का फिक्स टाइम: रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें। वीकेंड पर भी अपने स्लीप रूटीन को ज्यादा न बदलें।
नींद की क्वालिटी पर ध्यान दें: सिर्फ बिस्तर पर लेटे रहना काफी नहीं है, बिना बार-बार जागे गहरी और शांत नींद लेना जरूरी है।
नींद के समय से समझौता न करें: अलार्म से उठने के चक्कर में अपनी 7 से 8 घंटे की नींद में कटौती बिल्कुल न करें।
रोज सुबह तरोताज़ा महसूस करने का असली राज किसी स्लीप-ट्रैकर गैजेट या सही टाइमर अलार्म में नहीं, बल्कि आपकी नियमित जीवनशैली और पर्याप्त नींद में छिपा है।सुबह का अलार्म आपको कर सकता है बीमार, जानिए क्या है एक्सपर्ट्स की राय(सुनीत)
