बदलते मौसम में क्यों बिगड़ जाता है मूड और नींद की रूटीन, महसूस होती है उदासी और थकान, जानिए क्या है सीजनल डिप्रेशन

क्या आपको मौसम बदलते ही अचानक थकान, नींद की समस्या और उदासी घेर लेती है? यह सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) यानी मौसमी डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है। धूप की कमी से दिमाग में सेरोटोनिन घटता है और शरीर ज्यादा मेलाटोनिन बनाने लगता है, जिससे मूड और नींद बिगड़ जाते हैं। खासकर महिलाएं और युवा इसमें ज्यादा प्रभावित होते हैं। जानें SAD के लक्षण और आसान उपाय जैसे धूप में समय बिताना, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।

क्या आपने कभी महसूस किया है कि जैसे ही दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं, अचानक मन उदास-सा हो जाता है, शरीर थकने लगता है और नींद जरूरत से ज्यादा आने लगती है? कई बार हम सोचते हैं कि यह सिर्फ आलस या मौसम की थकान है, लेकिन दरअसल यह सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर यानी SAD का संकेत हो सकता है। इसे साधारण भाषा में सीजनल डिप्रेशन भी कहा जाता है।

seasonal affective depression

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SAD आखिर क्यों होता है

SAD डिप्रेशन का एक प्रकार है, जो आमतौर पर ठंड के मौसम में या दिन के उजाले में कमी आने पर ज्यादा दिखाई देता है। इस दौरान धूप की कमी से दिमाग में सेरोटोनिन नाम का हार्मोन घट जाता है, जो मूड को नियंत्रित करता है। वहीं ठंड और अंधेरे में शरीर ज्यादा मेलाटोनिन बनाता है, जिससे नींद बढ़ जाती है और ऊर्जा घट जाती है। इसी वजह से शरीर की प्राकृतिक बॉडी क्लॉक यानी सर्केडियन रिद्म बिगड़ जाती है और नींद-जागने का पैटर्न असामान्य हो जाता है।

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