Elephant Foot Yam for Hemorrhoids : बवासीर की समस्या से आजकल कई लोग ग्रसित है। अनियमित खान-पान और कम फाइबर वाली डाइट व सिटिंग जॉब के चलते पाइल्स का खतरा बना रहता है। ऐसे में बवासीर यानी पाइल्स की समस्या से परेशान लोगों के लिए सूरन (जिमीकंद) की सब्जी काफी फायदेमंद मानी जाती है। आयुर्वेद में सूरन को बवासीर के मरीजों के लिए खास बताया गया है। आचार्य भावमिश्र ने भावप्रकाश निघंटु में इसके औषधीय गुणों का वर्णन किया है। वहीं, आचार्य वाग्भट ने अष्टांग हृदय में भी सूरन को बवासीर के मरीजों के लिए अच्छा बताया है। आयुर्वेद के अनुसार, सूरन डाइजेशन बेहतर करने, भूख बढ़ाने और कफ-वात से जुड़ी समस्याओं में मदद करता है।
पाइल्स की समस्या से कैसे निजात पाएं (Image AI Generated and Newsroom Verified)
बवासीर होने पर अक्सर कब्ज, पेट ठीक से साफ न होना और मल त्याग करते समय जोर लगाने जैसी समस्याएं होती हैं। इससे गुदा के आसपास की नसों पर दबाव पड़ता है और मस्सों में दर्द, जलन व सूजन बढ़ सकती है। ऐसे में सूरन को डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। आयुर्वेद में इसे अर्शघ्न यानी बवासीर में लाभ पहुंचाने वाला बताया गया है। आइए जानते हैं सूरन खाने के फायदे, आयुर्वेद में इसका महत्व और इसकी सब्जी बनाने का सही तरीका क्या है।
सूरन क्यों है बवासीर के लिए फायदेमंद
आयुर्वेद में बवासीर को अर्श रोग कहा जाता है। सूरन यानी जिमीकंद को इसके लिए उपयोगी सब्जियों में शामिल किया गया है। आचार्य भावमिश्र ने भावप्रकाश निघंटु में सूरन के गुणों का वर्णन करते हुए लिखा है कि
सूरणं दीपनं रूक्षं तीक्ष्णोष्णं कफवातजित्।
लघु पाके कटु ग्राहि विष्टभि चातिसूदनम्॥
अर्थ: सूरन डाइजेशन को बेहतर करने, भूख बढ़ाने और कफ-वात से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद करता है। इसकी तासीर गर्म होती है और यह खाने में हल्का माना गया है। आयुर्वेद में इन्हीं गुणों के कारण इसे बवासीर के मरीजों के लिए फायदेमंद बताया गया है।आचार्य वाग्भट ने अष्टांग हृदय के सूत्रस्थान में भी सूरन को बवासीर के मरीजों के लिए अच्छा बताया है।
सूरणः कफवातार्शसां पथ्यः स्वेदेऽभ्यवहृतौ तथा।
अर्थ: सूरन खासतौर पर कफ और वात से जुड़ी बवासीर में फायदेमंद है। इसका इस्तेमाल खाने के साथ-साथ गर्म सेंक के रूप में भी किया जा सकता है।
बवासीर में सूरन खाने के फायदे
सूरन को आयुर्वेद में भूख बढ़ाने और डाइजेशन बेहतर करने वाला माना गया है। इसमें मौजूद पोषक तत्व और फाइबर पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट करते हैं। बवासीर के मरीजों के लिए डाइजेशन ठीक रखना जरूरी है, क्योंकि पेट साफ न होने और कब्ज के कारण परेशानी बढ़ सकती है।
बवासीर में कब्ज सबसे ज्यादा परेशान करने वाली समस्याओं में से एक है। मल सख्त होने पर मल त्याग करते समय जोर लगाना पड़ता है, जिससे मस्सों में दर्द और सूजन बढ़ सकती है। सूरन को संतुलित डाइट में शामिल करने से फाइबर मिलता है। इसके साथ पर्याप्त पानी पीने और फल-सब्जियां खाने से मल को मुलायम रखने में मदद मिलती है।
भावप्रकाश निघंटु में सूरन को कफ और वात को कम करने वाला बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार, कफ और वात से होने वाली बवासीर में सूरन खाना फायदेमंद है। यही वजह है कि पारंपरिक आयुर्वेदिक डाइट में इसका खास महत्व है।
सूरन को अच्छी तरह पकाकर सब्जी के रूप में खाया जा सकता है। इसमें फाइबर और दूसरे पोषक तत्व होते हैं। कम तेल और हल्के मसालों के साथ तैयार सूरन की सब्जी रोजमर्रा की डाइट में शामिल की जा सकती है। इसके साथ दाल, हरी सब्जियां और पर्याप्त पानी लेना भी जरूरी है।
सूरन की सब्जी कैसे बनाएं
बवासीर की समस्या में सूरन की सब्जी बनाते समय ज्यादा तेल और मिर्च-मसालों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसे हल्के मसालों के साथ इस तरह तैयार कर सकते हैं।
- सबसे पहले सूरन का छिलका उतारकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
- अब इसे अच्छी तरह धोकर पानी में नरम होने तक उबाल लें।
- एक कड़ाही में थोड़ा तेल डालें और उसमें जीरा, हल्दी, धनिया पाउडर और करी पत्ता डालें।
- इसमें उबला हुआ सूरन डालकर अच्छी तरह पकाएं।
- स्वाद के लिए थोड़ी इमली या नींबू का रस मिला सकते हैं।
- सब्जी को अच्छी तरह पकाकर कम तेल और हल्के मसालों के साथ खाएं।
बवासीर में सूरन के साथ इन चीजों को भी डाइट में करें शामिल
बवासीर की समस्या में सिर्फ सूरन खाने से काम नहीं चलेगा। अपनी पूरी डाइट का ध्यान रखना भी जरूरी है। रोजाना पपीता, अमरूद, सेब, हरी सब्जियां, दलिया, ओट्स और दालें खाएं। इनसे शरीर को फाइबर मिलता है और कब्ज की समस्या कम करने में मदद मिलती है। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। मलत्याग करते समय जोर लगाने और लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने से बचें। रोजाना थोड़ी देर टहलने की आदत डालें। इससे डाइजेशन बेहतर रखने में मदद मिलती है। अगर बवासीर में लगातार खून आ रहा है, तेज दर्द है या मस्सों की परेशानी बढ़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी आयुर्वेद के शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रयोग से पहले किसी चिकित्सक की सलाह अवश्य ले लें।
