Samosa Jalebi Can Be Dangerous As Cigarettes In Hindi: अब जब आप चाय के साथ गरमागरम समोसा लेने जाएं या किसी त्योहार पर जलेबी खाने का मन बने, और सामने पैकेट पर बड़ा सा लिखा हो 'स्वास्थ्य के लिए हानिकारक' तो सोचिए आपको कैसा लगेगा? लेकिन जल्द ही ऐसा होने वाला है। सरकार अब हाई फैट, शुगर और साल्ट (HFSS) वाले फूड आइटम्स पर भी सिगरेट जैसी हेल्थ वॉर्निंग लगाने की तैयारी में है।
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एफएसएसएआई यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसके बाद समोसे, जलेबी, बर्गर, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे प्रोडक्ट्स पर चेतावनी लेबल देना जरूरी हो सकता है। मतलब, स्वाद अब सेहत की चेतावनी के साथ मिलेगा। आइए जानते हैं इस नए फैसले के पीछे की सोच और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा। साथ ही, इस पर डॉक्टर की राय भी जानेंगे।
स्वाद अब सेहत की चेतावनी के साथ
अब तक सिगरेट या शराब जैसी चीजों पर ही ‘स्वास्थ्य के लिए हानिकारक’ जैसे वॉर्निंग लेबल लगाए जाते थे, लेकिन अब वही चेतावनी आपको खाने की चीजों पर भी देखने को मिल सकती है। खासकर उन फूड्स पर, जिनमें बहुत ज्यादा वसा, चीनी या नमक होता है। समोसा, जलेबी, बर्गर, चिप्स, बिस्किट ये सब हमारे रोजमर्रा के खाने का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इनका बार-बार और ज्यादा मात्रा में सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अब सरकार चाहती है कि जब भी कोई व्यक्ति इन चीजों को खरीदे, तो उसे पहले से ही पता हो कि ये प्रोडक्ट कितना नुकसान कर सकता है।
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FSSAI का बड़ा कदम
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 'फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग' यानी पैकिंग के सामने वाले हिस्से पर चेतावनी देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसका मतलब ये है कि अगर कोई प्रोडक्ट एचएफएसएस (HFSS) कैटेगरी में आता है, तो उस पर साफ तौर पर लिखा होगा "अत्यधिक फैट/नमक/चीनी – सेहत के लिए हानिकारक"। ये लेबलिंग नियम सभी पैक्ड फूड्स पर लागू हो सकते हैं। इसका मकसद है लोगों को चीजें खरीदते समय पूरी जानकारी के साथ फैसला लेने के लिए जागरूक बनाना है।
बच्चों को आकर्षित करने वाले विज्ञापनों पर भी लग सकती है रोक
इस प्रस्ताव में सिर्फ पैकिंग पर चेतावनी देना ही नहीं, बल्कि टीवी और सोशल मीडिया पर एचएफएसएस फूड्स के विज्ञापनों पर भी सख्ती की बात कही गई है। खासकर वे विज्ञापन जो बच्चों को लुभाने के लिए बनाए जाते हैं, उन पर बैन लगाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि बच्चे जल्दी इन चीजों की आदत पकड़ लेते हैं और आगे चलकर ये आदतें मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का कारण बन सकती हैं। ऐसे में विज्ञापनों पर रोक लगाकर बच्चों की हेल्दी आदतों को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
बढ़ती बीमारियों पर लगाम लगाने की कोशिश
आजकल हर दूसरा व्यक्ति मोटापे, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हार्ट डिजीज जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। इन बीमारियों की एक बड़ी वजह है प्रोसेस्ड और असंतुलित खानपान। रोज समोसे, जलेबी या पैकेज्ड स्नैक्स खाना धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है, जो शुरुआत में पता भी नहीं चलता। ऐसे में सरकार चाहती है कि लोगों को खाने के बारे में जागरूक किया जाए और चेतावनी देकर उन्हें सोचने का मौका दिया जाए।
भारतीय खाने से दूरी नहीं मगर संतुलन जरूरी
यह कदम भारतीय व्यंजनों को बदनाम करने के लिए नहीं है। समोसा या जलेबी कोई जहर नहीं है, लेकिन रोज और ज्यादा मात्रा में इन्हें खाना हानिकारक हो सकता है। एफएसएसएआई का ये प्रस्ताव इसी संतुलन की तरफ इशारा करता है - खाना खाइए, पर सोच-समझकर और सीमित मात्रा में। जैसे हम सिगरेट के पैकेट पर वॉर्निंग देखकर सोचते हैं, वैसे ही अब समोसे-जलेबी जैसे फूड आइटम्स पर चेतावनी देखकर भी दो बार सोचेंगे।
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सिगरेट जितना क्यों खतरनाक है समोसे और जलेबी
यह सवाल वाकई चौंकाने वाला है, लेकिन इसके पीछे गंभीर तर्क हैं। सिगरेट की तरह एचएफएसएस फूड्स यानी अधिक फैट, चीनी और नमक वाले फूड धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि सिगरेट का नुकसान फेफड़ों को तुरंत दिखता है, और एचएफएसएस फूड्स का असर धीरे-धीरे मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों के रूप में सामने आता है। जब रोज समोसा, जलेबी या कोल्ड ड्रिंक जैसे आइटम आदत बन जाते हैं, तब उनका असर उतना ही खतरनाक हो सकता है जितना सिगरेट का। इसी वजह से अब इन्हें 'हेल्थ वॉर्निंग' के दायरे में लाया जा रहा है।
AIIMS नागपुर की स्टडी भी करती है समर्थन
AIIMS नागपुर की हालिया स्टडी के मुताबिक, हाई फैट, शुगर और नमक वाले फूड्स जैसे समोसा-जलेबी न सिर्फ मोटापे, बल्कि टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसे रोगों को भी जन्म देते हैं। स्टडी में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से ऐसे स्नैक्स खाते हैं, उनमें इन्फ्लेमेशन यानी सूजन और इम्यून सिस्टम वीक होने की संभावना ज्यादा होती है। ऐसे में सरकार का ये हेल्थ वॉर्निंग वाला कदम साइंटिफिकली भी सही साबित होता है।
डॉक्टरों की नजर में ये फैसला क्यों जरूरी है?
डॉ. आशीष कुमार, जो अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के कार्डियोलॉजी विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर हैं, का मानना है कि सरकार का ये कदम बिलकुल सही दिशा में है। उनका कहना है कि आज भारत में बिना किसी पारिवारिक हिस्ट्री के भी युवा लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है खराब खानपान और लोगों में जागरूकता की कमी।
समोसा और जलेबी जैसे हाई फैट और हाई शुगर फूड्स जब रोज खाए जाते हैं, तो ये शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ाते हैं, इंसुलिन रेसिस्टेंस को बढ़ावा देते हैं और अंदरूनी सूजन को जन्म देते हैं ये सभी हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मुख्य कारण हैं। डॉ. आशीष कहते हैं कि चेतावनी लेबल की तरह यह पहल भी सीट बेल्ट की तरह है यह आपको रोकती नहीं, बस आपको सावधान करती है। अगर इससे कुछ लोग भी सोच-समझकर खाना चुनने लगें, तो अगली पीढ़ी को दिल की बीमारियों से बचाया जा सकता है।
समोसा-जलेबी को हेल्थ वॉर्निंग लिस्ट में शामिल करना जरूरी
अमृता अस्पताल के एक अन्य डॉक्टर - डॉ. मोहित शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन का मानना है कि समोसा-जलेबी जैसे पारंपरिक स्नैक्स को हेल्थ वॉर्निंग लिस्ट में शामिल करना बिल्कुल जरूरी पब्लिक हेल्थ मूव है। उनका कहना है कि ये चीजें हमें दिखने में मासूम लगती हैं, लेकिन इनमें ट्रांस फैट, रिफाइंड शुगर और खाली कैलोरीज़ की भरमार होती है। यही आदतें भारत में मोटापा, डायबिटीज और हार्ट डिजीज का सबसे बड़ा कारण बन रही हैं।
डॉ. मोहित कहते हैं कि ये कदम किसी के स्वाद को शर्मिंदा करने के लिए नहीं है, बल्कि लोगों को सही जानकारी देकर सशक्त बनाने के लिए है। जैसे सिगरेट पर चेतावनी लोगों को सोचने पर मजबूर करती है, वैसे ही इन फूड्स पर भी हेल्थ वॉर्निंग उन्हें सोच-समझकर खाने की दिशा में प्रेरित करेगी। इंडिया में अब ज़रूरत है कि हम रोज़मर्रा की खाने की आदतों को एक नए नजरिए से देखें, और यह पहल उस बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
With Inputs: Dr Ashish Kumar, Senior Consultant, Cardiology And Dr Mohit Sharma, Senior Consultant, Internal Medicine, Amrita Hospital, Faridabad
