Exercise for Flat Stomach: क्या वजन कम होते ही पेट अपने आप सपाट हो जाता है? जरूरी नहीं। कई बार वजन घटने के बाद भी पेट पहले जैसा नजर आ सकता है और इसकी वजह सिर्फ शरीर का वजन नहीं, बल्कि मांसपेशियों की ताकत, शरीर की बनावट और पोस्चर भी हो सकते हैं। फिटनेस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट रुजुता दिवेकर ने अपने एक वीडियो में इसी बात पर ध्यान दिलाया है।
उनके अनुसार, केवल तराजू पर कम होता नंबर फिटनेस का पूरा पैमाना नहीं है। शरीर को मजबूत बनाना, मांसपेशियों पर काम करना और पोस्चर सुधारना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने तीन ऐसी एक्सरसाइज बताई हैं जिन्हें वर्कआउट रूटीन में शामिल किया जा सकता है। खास बात यह है कि इन एक्सरसाइज का मकसद सिर्फ पेट की चर्बी पर काम करना नहीं, बल्कि पूरे शरीर को मजबूत और बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद करना है। यानी फोकस सिर्फ फ्लैट पेट नहीं, बल्कि मजबूत शरीर पर होना चाहिए।
1. फ्रंट स्क्वाट से मजबूत करें लोवर बॉडी
फ्रंट स्क्वाट इस रूटीन का पहला व्यायाम है। इसे डंबल या केटलबेल के साथ किया जा सकता है। अगर आप वजन उठाने के लिए अभी तैयार नहीं हैं, तो शुरुआत बिना वजन के भी की जा सकती है।
इस एक्सरसाइज में स्क्वाट करते हुए नीचे जाना और फिर वापस ऊपर आना होता है। यह खास तौर पर पैरों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है।
रुजुता दिवेकर के अनुसार, मजबूत निचला शरीर बॉडी कम्पोजिशन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर सकता है। इसे अपने वर्कआउट में धीरे-धीरे शामिल किया जा सकता है।
2. पश्चिमोत्तानासन से शरीर को दें स्ट्रेच
दूसरा व्यायाम योग का पश्चिमोत्तानासन है। इसमें पैरों को सामने सीधा रखकर शरीर को धीरे-धीरे आगे की ओर झुकाया जाता है।
यह शरीर के पिछले हिस्से, खासकर हैमस्ट्रिंग में खिंचाव और लचीलापन बढ़ाने में मदद कर सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने वालों के लिए भी शरीर को स्ट्रेच करना उपयोगी महसूस हो सकता है।
रुजुता के बताए रूटीन में यह एक्सरसाइज शरीर की गतिशीलता और लचीलेपन पर ध्यान देती है। इसे करते समय शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार स्ट्रेच करना बेहतर है।
3. बर्ड डॉग से पोस्चर पर करें काम
तीसरा व्यायाम है बर्ड डॉग। इसे करने के लिए हाथों और घुटनों के बल जमीन पर आ जाएं। फिर एक हाथ और उसके विपरीत पैर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। कुछ सेकंड रुककर शुरुआती स्थिति में लौटें और दूसरी तरफ दोहराएं।
यह एक्सरसाइज शरीर के संतुलन और कोर की स्थिरता पर काम करने में मदद कर सकती है। साथ ही, सही पोस्चर बनाए रखने की आदत विकसित करने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
सिर्फ पेट नहीं, पूरी बॉडी पर दें ध्यान
इस पूरी बात का दिलचस्प हिस्सा यही है कि फिटनेस का लक्ष्य केवल पेट का आकार कम करना नहीं होना चाहिए। मजबूत पैर, बेहतर पोस्चर, लचीला शरीर और अच्छी मूवमेंट भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
इन एक्सरसाइज को अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे रूटीन में शामिल किया जा सकता है। किसी चोट, दर्द या स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में एक्सरसाइज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध यूट्यूबर रुजुता दिवेकर के वीडियो में बताए गए टिप्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी संबंधित क्रिएटर के व्यक्तिगत विचार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत इन टिप्स या दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।)
