Alzheimer’s Myths And Facts : अल्जाइमर दिमाग से जुड़ा एक गंभीर रोग है, जिसमें हमारी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है। अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि अल्जाइमर सिर्फ बुढ़ापे की बीमारी है। लेकिन सच यह है कि उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा अवश्य बढ़ता है, लेकिन यह रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। मेडिकल साइंस में इसे “न्यूरोडीजेनेरेटिव डिसऑर्डर” माना जाता है, जो धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और याददाश्त, सोचने व समझने की क्षमता को प्रभावित करता है। आज हम आपको अल्जाइमर से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथक और उनकी सच्चाई बताने जा रहे हैं।
मिथक 1: Alzheimer’s सिर्फ बुजुर्गों को होता है
सच्चाई: अल्जाइमर का जोखिम 60 वर्ष से अधिक आयु में बढ़ जाता है, लेकिन यह केवल उम्र की बीमारी नहीं है। 40–50 वर्ष की आयु में भी इसके शुरुआती लक्षण सामने आ सकते हैं। इसे अर्ली-ऑनसेट अल्जाइमर कहा जाता है।
मिथक 2: भूलना यानी Alzheimer’s
सच्चाई: हर छोटी भूल को अल्जाइमर नहीं कहा जा सकता। कभी-कभार चीजें भूलना सामान्य है। अल्जाइमर में व्यक्ति रोज़मर्रा की चीजें, रास्ते, नाम या अपनी दिनचर्या तक भूलने लगता है और यह धीरे-धीरे बढ़ता है।
मिथक 3: अल्जाइमर का कारण सिर्फ उम्र है
सच्चाई: अल्जाइमर के पीछे सिर्फ उम्र नहीं बल्कि कई फैक्टर जिम्मेदार हैं – जैसे जेनेटिक कारण, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्मोकिंग, मोटापा और अनहेल्दी लाइफस्टाइल। रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक शरीर पर असर डालने वाले ये कारण ब्रेन कोशिकाओं को भी कमजोर कर देते हैं।
मिथक 4: Alzheimer’s का कोई इलाज नहीं है, रोकथाम भी संभव नहीं
सच्चाई: भले ही अभी तक अल्जाइमर का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसकी प्रगति को धीमा किया जा सकता है। हेल्दी लाइफस्टाइल, बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और मानसिक सक्रियता (पढ़ना, लिखना, पजल सॉल्व करना) से इसे नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एशियन अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर और हेड डॉ. नेहा कपूर बताती हैं, कि 40 या 50 वर्ष की उम्र में भी अल्जाइमर के लक्षण दिख सकते हैं। शुरुआती पहचान और समय रहते डॉक्टर से परामर्श लेना बहुत जरूरी है, ताकि मरीज के जीवन में गुणवत्ता बनी रहे।” डॉ. आगे कहती हैं, “अगर परिवार के किसी सदस्य को लगातार भूलने की समस्या हो, साधारण बातचीत करते समय वह शब्द भूलने लगें या व्यवहार में बदलाव दिखे, तो इसे सामान्य भूलने की आदत मानकर इग्नोर नहीं करना चाहिए। यह अल्जाइमर की शुरुआत हो सकती है।”
नोट - अल्जाइमर किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। सही जानकारी, समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार के जरिए इससे जुड़े खतरों को कम किया जा सकता है।
