Monsoon Nail Hygiene: बारिश का मौसम आते ही डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसी बीमारियों की चर्चा शुरू हो जाती है, लेकिन एक ऐसा कारण भी है जो कई बार हमारी नजर से छूट जाता है। वह है नाखूनों के नीचे जमा होने वाली गंदगी। मॉनसून में बढ़ी हुई नमी और गीला वातावरण बैक्टीरिया व फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना देता है। अगर गंदे नाखूनों से खाना खाया जाए या बार-बार मुंह, आंख और नाक को छुआ जाए, तो ये सूक्ष्मजीव शरीर में पहुंच सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं। अच्छी बात यह है कि थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि मॉनसून में नाखूनों की सफाई क्यों जरूरी है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
बरसात में नाखून कैसे आपको बीमार बना सकते हैं
नाखूनों के नीचे क्यों जमा होते हैं बैक्टीरिया
नाखूनों के नीचे जमा होने वाली गंदगी को मेडिकल भाषा में सबंगुअल डेब्रीज (Subungual debris) कहा जाता है। इसमें धूल, मिट्टी, पसीना, मृत त्वचा की कोशिकाएं और अन्य छोटे कण जमा हो जाते हैं। मॉनसून में बढ़ी हुई नमी इन सूक्ष्मजीवों के लंबे समय तक जीवित रहने में मदद कर सकती है।
बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से नाखूनों के नीचे बैक्टीरिया और फंगस पनपने की संभावना बढ़ जाती है। अगर हाथों और नाखूनों की साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो ये सूक्ष्मजीव शरीर में पहुंचकर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
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कौन-से बैक्टीरिया हो सकते हैं मौजूद
वैज्ञानिक अध्ययनों में गंदे नाखूनों के नीचे कई तरह के सूक्ष्मजीव पाए गए हैं। इनमें कुछ बैक्टीरिया और फंगस संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।
| सूक्ष्मजीव | क्या नुकसान पहुंचा सकता है? |
|---|---|
| E. coli | दस्त, पेट दर्द, फूड पॉइजनिंग |
| Salmonella | गंभीर फूड-बोर्न इंफेक्शन |
| Staphylococcus aureus | त्वचा और घाव का संक्रमण |
| Candida | नाखूनों और आसपास फंगल संक्रमण |
ध्यान रखें कि हर व्यक्ति के नाखूनों में ये बैक्टीरिया मौजूद हों, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन अगर नाखूनों की सफाई न हो और हाथ बार-बार गंदगी के संपर्क में आएं, तो इनके पनपने का खतरा बढ़ सकता है।
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किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
कुछ लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा हो सकता है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज के मरीज, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग और खाना बनाने वाले लोग शामिल हैं। अगर ये लोग गंदे नाखूनों से भोजन तैयार करें या खाएं, तो संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
इसके अलावा, अगर आपको नाखून चबाने की आदत है, तो यह भी बैक्टीरिया को सीधे मुंह के जरिए शरीर में पहुंचाने का आसान रास्ता बन सकती है।
सही नेल हाइजीन कैसे रखें
सिर्फ हाथ धोना ही काफी नहीं है, बल्कि नाखूनों की सफाई भी उतनी ही जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं।
- कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोएं।
- उंगलियों के बीच और नाखूनों के नीचे भी अच्छी तरह सफाई करें।
- जरूरत पड़ने पर मुलायम नेल ब्रश का इस्तेमाल करें।
- हाथ धोने के बाद नाखूनों और उंगलियों को अच्छी तरह सुखाएं। लगातार नमी रहने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
- नाखून हमेशा छोटे रखें, क्योंकि लंबे नाखूनों में गंदगी ज्यादा जमा होती है।
- अगर घर में एक ही नेल कटर कई लोग इस्तेमाल करते हैं, तो उसे उपयोग से पहले और बाद में साफ करना बेहतर होता है।
- खाना बनाने और खाने से पहले हाथ और नाखून दोनों साफ रखें।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए
अगर नाखूनों का रंग पीला, हरा या काला होने लगे, उनमें दर्द, सूजन या पस दिखाई दे, नाखून मोटे होकर टूटने लगें या बार-बार संक्रमण हो रहा हो, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) से जांच कराना जरूरी है। समय पर इलाज कराने से संक्रमण बढ़ने से रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
मॉनसून में संक्रमण से बचाव सिर्फ साफ पानी पीने या बाहर का खाना कम खाने तक सीमित नहीं है। नाखूनों की साफ-सफाई भी आपकी सेहत की सुरक्षा का अहम हिस्सा है। नाखूनों के नीचे जमा सबंगुअल डेब्रीज बैक्टीरिया और फंगस के लिए छिपने की जगह बन सकता है। ऐसे में हाथों और नाखूनों की नियमित सफाई, उन्हें अच्छी तरह सुखाना और छोटे रखना जैसी छोटी-छोटी आदतें आपको पेट और त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकती हैं। मॉनसून में अगर आप इन आसान बातों का ध्यान रखेंगे, तो संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
