Blood Test For Disease Detection: सोचिए, आप एक ऐसा मेडिकल टेस्ट करवाएं जो भविष्य में होने वाली सेहत की समस्याओं के बारे में पहले से ही जानकारी दे। मतलब कोई बीमारी होने से पहले ही आपको चेतावनी मिल जाए, ताकि आप समय रहते तैयारी कर सकें, सावधानी बरत सकें और बीमारी को होने से रोक भी सकें। सुनने में ये बात आपको भले ही सपना लगे लेकिन अब विज्ञान ने इसे सच कर दिखाया है।
Blood Test For Disease Detection
वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि पिनप्रिक ब्लड टेस्ट (Pinprick Blood Test) बीमारी के लक्षण दिखने से 10 साल पहले ही बता सकता है कि भविष्य में आपको कौन-सी बीमारी होने का खतरा है। इस आइडिया के पीछे सोच ये है कि लक्षण आने का इंतजार क्यों करना क्योंकि अब डॉक्टर शुरुआत में ही यह पहचान सकेंगे कि कौन-से लोग हाई रिस्क में हैं।
बस उंगली से निकली एक छोटी-सी खून की बूंद से ही रिसर्चर सैकड़ों, हजारों तरह के अणुओं जैसे- प्रोटीन, मेटाबोलाइट्स और सेल डैमेज के मार्कर को माप लेते हैं। इन सबको मिलाकर वो एक तरह का पैटर्न बनाते हैं, जो आगे चलकर बता देता है कि आपको कैंसर, हार्ट डिजीज, डायबिटीज, डिमेंशिया या दूसरी बीमारियों का खतरा है या नहीं।
हाल ही में वैज्ञानिकों ने ऐसे बड़े रिसर्च किए हैं जिनमें उन्होंने खून के अंदर मौजूद हजारों तरह के प्रोटीन, फैट, शुगर और छोटे-छोटे अणुओं को एक साथ मापा। इन सबको देखकर वे ऐसे पैटर्न ढूंढते हैं, जिनसे पता लग सके कि किसी व्यक्ति को आगे आने वाले 10 साल में कौन-सी बीमारी हो सकती है।
इन पैटर्न को लोगों के लंबे समय के हेल्थ रिकॉर्ड से मिलाकर देखा जाता है। इससे वैज्ञानिक ऐसे मॉडल बना लेते हैं जो बीमारी के लक्षण दिखने से काफी पहले ही शरीर में होने वाले शुरुआती बदलाव पकड़ लेते हैं।
एक बड़े प्रोजेक्ट में यूके बायोबैंक के सैंपल लिए गए थे। इससे बहुत सटीक प्रोटीन सिग्नेचर तैयार हुए, जिनसे दर्जनों बीमारियों का 10 साल बाद तक का जोखिम पहले से ही समझ में आने लगा।
वैज्ञानिक असल में ढूंढ क्या रहे हैं?
अलग–अलग रिसर्च टीमों ने ऐसे प्रोटीन संकेत पहचान लिए हैं जो कैंसर, दिमाग से जुड़ी बीमारियां और कुल 67 तरह की बीमारियों का अगले 10 सालों का जोखिम पहले ही बता सकते हैं। कुछ मामलों में तो ये टेस्ट पुराने या स्टैंडर्ड मेडिकल तरीकों से भी बेहतर साबित हुए हैं।
कुछ और अध्ययनों में सिर्फ फिंगर-प्रिक (उंगली से लिए गए) छोटे नमूनों से ही अल्जाइमर जैसी बीमारियों के बायोमार्कर मापे गए हैं। खास बात ये कि इनके नतीजे वही आए जो नस से लिए गए खून (वेनस ब्लड टेस्ट) में आते हैं। इसका मतलब यह है कि आगे चलकर उंगली चुभाने वाला छोटा टेस्ट भी दिमाग की बीमारियों का पता लगा सकेगा।
ये सारी खोजें इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि भविष्य में सिर्फ खून की एक छोटी-सी बूंद से ही हम एक साथ कई तरह की बीमारियों के जोखिम के बारे में पता लगा सकेंगे।
हेल्थ सेक्टर के लिए बेहद फायदेमंद
सीधे और सरल शब्दों में समझें तो अभी ज्यादातर बीमारियों का पता तब चलता है जब लक्षण दिखने लगते हैं। ऐसे में इलाज मुश्किल, लंबा और महंगा होता है। बीमारी का देर से पता चलने पर कई बार भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में अगर पहले से चेतावनी देने वाला भरोसेमंद ब्लड टेस्ट आ जाए तो मेडिकल सिस्टम के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि लोग समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव, नियमित चेकअप या हल्के, शुरुआती इलाज शुरू कर सकेंगे।
