Vat Savitri Vrat 2024: सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री का व्रत बहुत खास होता है। ऐसी मान्यता है कि जो सुहागिन महिला इस व्रत को करती है, उसके पती की उम्र लंबी होती है। उसे सुख-शांति और समृद्धि मिलती है। हिन्दू पंचाग के अनुसार इस व्रत को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस ला वट सावित्री का व्रत 6 जून गुरूवार को रखा जाएगा। आपको बता दें कि यह व्रत पूरे तीन दिन तक चलता है। इसमें वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा करनी होती है। साथ ही, वृक्ष के पर सूत बांधकर 108 बार परिक्रमा भी लगानी पड़ती है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और कुछ भी नहीं खाती-पीती हैं। लेकिन इस तरह व्रत रख पाना बुजुर्ग महिलाओं के लिए थोड़ मुश्किल हो सकता है। जो सुहागिन महिलाएं बुजुर्ग हैं या जिनकी उम्र काफी हो गई है, वे व्रत को लेकर काफी असमंजस में रहती हैं। क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य के लिए लिहाज से उनके लिए व्रत रख पाना काफी मुश्किल हो सकता है। वे अक्सर यह सवाल पूछती हैं कि आखिर वे स्वस्थ तरीके से वट सावित्री का व्रत कैसे रख सकती हैं। इस लेख में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
Vat Savitri Vrat 2024
बुजुर्ग महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत रखने के टिप्स
भूखे न रहें
बुजुर्ग महिलाएं अगर इस व्रत को रख रही हैं, तो उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि वे खाली पेट न रहें। क्योंकि इससे व्रत के दौरान व्रत के दौरान बहुत थकान और कमजोरी महसूस कर सकती हैं। इसलिए खाली पेट न रहें।
फलाहार ले सकते हैं
व्रत के दौरान यह सलाह दी जाती है कि किसी भी तरह का अन्न नहीं खाना चाहिए। लेकिन ऐसे में बुजुर्ग महिलाएं फलाहार ले सकती हैं। इससे उनके शरीर में एनर्जी बनी रहेगी।
पानी पी सकते हैं
आमतौर पर महिलाएं वट सावित्री का व्रत निर्जला रखती हैं। लेकिन मौसम को देखते हुए यह बुजुर्ग महिलाओं के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए बीच-बीच में पानी पीते रहे हैं और शरीर को हाइड्रेट रखने की कोशिश करें।
फेरे लगाते समय बरतें सावधानी
वट वृक्ष पर सूंत बांधकर पर 108 बार परिक्रमा लगाते समय कोई जल्दबाजी न करें। धीरे-धीरे परिक्रमा लगाएं। अगर घुटनों व जोड़ों में दर्द की समस्या है, तो बुजुर्ग महिलाएं इससे बच भी सकती हैं।
