Diwali Mein Asli Nakli Mithai Pehchane Ke Tarike: दिवाली का त्योहार मिठास और खुशियों से भरा होता है। घर-घर में मिठाईयां बनती हैं, तो बाजारों में रंग-बिरंगी मिठाइयों की लाइनें लग जाती हैं। लेकिन इसी मौके पर कई जगह नकली या मिलावटी मिठाई भी धड़ल्ले से बिकती हैं, जो स्वाद में भले अच्छी लगें, लेकिन सेहत के लिए जहर साबित हो सकती हैं। इसलिए इस दिवाली मिठाई खरीदते समय थोड़ा होशियार रहना जरूरी है। चलिए जानते हैं कुछ आसान घरेलू तरीके, जिनसे आप असली और नकली मिठाई की पहचान कुछ ही सेकंड में कर सकते हैं।
Diwali Mein Asli Nakli Mithai Pehchane Ke Tarike
चमकदार मिठाई से रहें सावधान
अगर मिठाई बहुत ज्यादा चमकदार दिख रही है, तो समझ लीजिए इसमें सिल्वर फॉयल की जगह नकली मेटैलिक पॉलिश या एल्युमिनियम फॉयल हो सकती है। असली चांदी की वर्क हमेशा हल्की और मटमैली होती है, जबकि नकली वाली में तेज ग्लॉस या मेटैलिक शाइन नजर आती है। ऐसे में मिठाई को खरीदने से पहले हल्के हाथ से रगड़कर देखें, अगर फॉयल उखड़ने लगे तो वह नकली है।
दूध से बनी मिठाई की खुशबू जांचें
कलाकंद, बर्फी या रसगुल्ला जैसी मिठाइयों में अगर असली दूध का इस्तेमाल हुआ है तो इनमें हल्की-सी मीठी महक आती है। वहीं नकली या मिलावटी मिठाई में डिटर्जेंट, सिंथेटिक फ्लेवर या चर्बी जैसी अजीब गंध महसूस होगी। मिठाई को सूंघकर उसकी क्वालिटी का अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर खुशबू अस्वाभाविक लगे, तो मिठाई लेने से बचें।
मिठाई का रंग हो नेचुरल तो समझिए असली है
दिवाली पर रंग-बिरंगी मिठाइयां खूब बिकती हैं, लेकिन यही रंग कई बार खतरे की घंटी होते हैं। ज्यादा गाढ़ा या चमकदार रंग दिखे तो समझ लीजिए इसमें आर्टिफिशियल कलर है। असली मिठाई का रंग हल्का और नेचुरल होता है। जैसे केसरिया रंग वाली मिठाई में हल्की पीली झलक दिखे तो वह केसर या हल्दी से बनी होगी, लेकिन बहुत चमकदार नारंगी रंग दिखे तो वह कैमिकल से रंगी हुई हो सकती है।
स्वाद और टेक्सचर से भी करें पहचान
मिलावटी मिठाई खाते ही जीभ पर अजीब कड़वाहट या चिपचिपापन महसूस होता है। असली मिठाई मुलायम, हल्की और सॉफ्ट टेक्सचर वाली होती है। जबकि नकली मिठाई का टेक्सचर ज्यादा सख्त, सूखा या ऑयली हो सकता है। अगर मिठाई मुंह में घुलने की बजाय चिपकने लगे तो यह साफ इशारा है कि उसमें सिंथेटिक मटीरियल या पुराना दूध इस्तेमाल हुआ है।
पैक्ड मिठाई खरीदें तो लेबल जरूर देखें
अगर आप पैक्ड मिठाई खरीद रहे हैं तो उसका लेबल जरूर पढ़ें। उस पर 'FSSAI' का लोगो, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट साफ लिखी होनी चाहिए। साथ ही मिठाई रखने का तापमान भी पैक पर दर्ज होना चाहिए। बिना लेबल या ढीले में बिकने वाली मिठाइयां हेल्थ के लिए रिस्क हो सकती हैं।
घर की बनी मिठाई सबसे सुरक्षित
दिवाली पर अगर वाकई मिठास चाहिए तो कोशिश करें कि मिठाई घर पर ही बनाई जाए। घर की बनी मिठाई में न तो मिलावट का डर होता है और न ही कैमिकल का। साथ ही स्वाद और प्यार दोनों दोगुने हो जाते हैं।
इस दिवाली अगर आप थोड़ी समझदारी दिखाएंगे तो न सिर्फ अपने परिवार को मिलावटी मिठाई के नुकसान से बचा सकेंगे, बल्कि त्योहार का असली स्वाद भी बरकरार रख पाएंगे। याद रखें, मिठास तभी मायने रखती है जब वो सेहत के साथ हो। इसलिए इस बार खरीदारी से पहले पहचान कीजिए असली या नकली मिठाई!
