Health Of Children In America Is Getting Worse: अब अमेरिका जैसे विकसित देश में भी बच्चों की सेहत को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि वहां के बच्चे पहले से ज्यादा बीमार हो रहे हैं और उनका मोटापा लगातार बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट में पिछले 20 सालों के डेटा का विश्लेषण किया गया है, जिसमें यह सामने आया कि बच्चों में न केवल मोटापा बढ़ा है, बल्कि मानसिक परेशानियां, नींद की कमी और गंभीर बीमारियों का खतरा भी पहले से कहीं ज़्यादा हो गया है। यह एक ऐसी तस्वीर पेश करता है, जो हर पैरेंट के लिए चिंता की वजह हो सकती है।
Health Of Children In America Is Getting Worse
मोटापा बन रहा है बच्चों के लिए बड़ी दिक्कत
रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका में 2 से 19 साल के बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। 2007-08 में यह आंकड़ा 17% था, जो अब 21% तक पहुंच गया है। प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इसके पीछे की बड़ी वजह मानी जा रही है। बच्चे अब पहले से कम चल-फिरते हैं, और स्क्रीन टाइम ज़्यादा हो गया है, जिससे उनके शरीर पर बुरा असर पड़ रहा है।
लंबे समय तक चलने वाली बीमारियां भी बढ़ीं
सिर्फ मोटापा ही नहीं, बच्चों में लंबे समय तक रहने वाली बीमारियां भी तेजी से बढ़ी हैं। 2011 में जहां 40% बच्चों को किसी न किसी क्रॉनिक बीमारी की पहचान मिली थी, वहीं 2023 तक यह आंकड़ा 46% हो गया। इनमें चिंता, डिप्रेशन और नींद की दिक्कतें भी शामिल हैं। साफ है कि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य भी धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है।
दूसरे देशों के मुकाबले अमेरिका की हालत खराब
यह जानकर हैरानी होती है कि अमेरिका जैसे देश में भी बच्चों की मौत की दर कनाडा, जर्मनी और जापान जैसे अमीर देशों से लगभग दोगुनी है। रिपोर्ट के मुताबिक शिशुओं में समय से पहले जन्म और अचानक मृत्यु के मामले तेजी से बढ़े हैं। वहीं बड़े बच्चों में सड़क हादसे और गंभीर चोटें मौत की बड़ी वजह बनी हैं।
बच्चे अकेलेपन और नींद की कमी से जूझ रहे हैं
बच्चों के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। डिप्रेशन, अकेलापन, नींद न आना और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे लक्षण आज के बच्चों में आम होते जा रहे हैं। बच्चे समाज की तकलीफों को जल्दी महसूस करते हैं और उन पर सबसे गहरा असर पड़ता है।
कई वजहें हैं जिम्मेदार
रिपोर्ट में कहा गया कि बच्चों की सेहत में आई गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई कारण हैं। जैसे- प्रोसेस्ड फूड का ज़्यादा सेवन, सुरक्षित माहौल की कमी, इलाज की असमान पहुंच और आर्थिक परेशानियां। इसके अलावा, स्वास्थ्य बजट में कटौती और टीकाकरण को लेकर गलतफहमियां भी स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं।
समाधान सिर्फ अस्पताल नहीं
रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि बच्चों की सेहत को सिर्फ अस्पतालों की जिम्मेदारी न मानें, बल्कि स्कूल, परिवार, ट्रांसपोर्ट और समाज के हर हिस्से को इसमें योगदान देना होगा। सामूहिक स्तर पर योजना बनाकर बच्चों को बेहतर माहौल देना ही अब समय की जरूरत है।
Source: IANS
