Monsoon Infection: बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई वायरल संक्रमणों का मौसम भी माना जाता है। इस दौरान अक्सर लोगों को छींक, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में अधिकांश लोग फ्लू (Influenza) और सामान्य सर्दी-जुकाम (Common Cold) को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, जबकि दोनों में काफी अंतर होता है। इन दिनों में सही पहचान न होने पर इलाज में देरी हो सकती है और संक्रमण दूसरों तक भी फैल सकता है। आइए जानते हैं कि फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम (Flu vs Common Cold) में क्या अंतर है और मानसून में इनका खतरा क्यों बढ़ जाता है।
मानसून में सर्दी-जुकाम और फ्लू का खतरा!
फ्लू और साधारण सर्दी-जुकाम में क्या अंतर है?
हालांकि फ्लू और साधारण सर्दी-जुकाम दोनों ही वायरल संक्रमण हैं, लेकिन इनके वायरस, लक्षणों की गंभीरता और शरीर पर प्रभाव अलग-अलग होते हैं। सामान्य सर्दी-जुकाम मुख्य रूप से राइनोवायरस (Rhinovirus) सहित कई प्रकार के वायरस के कारण होता है। इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और आमतौर पर हल्के होते हैं। वहीं फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस (Influenza Virus) के कारण होता है। इसके लक्षण अचानक शुरू होते हैं और शरीर पर लंबे समय के लिए गहरा असर डालते हैं।
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सामान्य सर्दी-जुकाम के प्रमुख लक्षण
- लगातार छींक आना
- नाक बहना या बंद होना
- गले में हल्की खराश
- हल्की खांसी
- कभी-कभी हल्का बुखार
- सामान्य कमजोरी
फ्लू के प्रमुख लक्षण
- अचानक तेज बुखार
- शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द
- सिरदर्द
- अत्यधिक थकान
- सूखी खांसी
- गले में दर्द
- ठंड लगना और भूख कम लगना
बारिश में क्यों बढ़ जाता है खतरा
मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है। कई वायरस इस मौसम में अधिक समय तक सक्रिय रह सकते हैं। इसके अलावा लोग बारिश से बचने के लिए बंद कमरों में ज्यादा समय बिताते हैं, जहां हवा का भरपूर वेंटिलेशन नहीं होता है। ऐसे स्थानों पर संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से वायरस आसानी से दूसरे लोगों तक पहुंच सकते हैं।
बारिश में भीगने के बाद शरीर का तापमान अचानक कम हो सकता है, जिससे कुछ लोगों में संक्रमण से लड़ने की क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। यदि पर्याप्त आराम, संतुलित आहार और स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए तो संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है।
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किन लोगों को ज्यादा खतरा
हालांकि फ्लू हर किसी को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसके गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है। इन लोगों में फ्लू कभी-कभी निमोनिया जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण भी बन सकता है।
- 5 साल से कम उम्र के बच्चे
- 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग
- गर्भवती महिलाएं
- अस्थमा, डायबिटीज या हृदय रोग से पीड़ित लोग
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीज
| बचाव का उपाय | कैसे मदद करता है |
|---|---|
| नियमित रूप से हाथ धोएं | साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोने से वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण कम होता है। |
| खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें | रूमाल, टिश्यू या कोहनी का इस्तेमाल करने से संक्रमण दूसरों तक फैलने से रोका जा सकता है। |
| बारिश में भीगने के बाद कपड़े बदलें | गीले कपड़ों को तुरंत बदलकर शरीर को गर्म रखें, इससे संक्रमण का जोखिम कम हो सकता है। |
| पर्याप्त नींद और संतुलित आहार लें | अच्छी नींद और पौष्टिक भोजन प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। |
| घर और ऑफिस में वेंटिलेशन बनाए रखें | ताजी हवा का आवागमन होने से बंद जगहों में वायरस फैलने का खतरा कम होता है। |
| बीमार व्यक्ति से उचित दूरी रखें | संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब रहने से फ्लू और अन्य वायरल संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। |
| फ्लू वैक्सीन लगवाएं | डॉक्टर की सलाह के अनुसार हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाना, विशेषकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अन्य हाई-रिस्क लोगों के लिए, गंभीर संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है। |
कब करें डॉक्टर से संपर्क?
यदि तेज बुखार तीन दिन से अधिक बना रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द महसूस हो, लगातार उल्टी हो रही हो या कमजोरी इतनी बढ़ जाए कि सामान्य काम करना मुश्किल हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
