Flu Se Fight: फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा होने पर शरीर सिर्फ संक्रमण से नहीं लड़ रहा होता, बल्कि इस दौरान उसे अपनी ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत भी पहले से ज्यादा महसूस होती है। इस समय में बुखार, गले में खराश, खांसी, नाक बंद होना, शरीर में दर्द और थकान के कारण अक्सर भूख कम हो जाती है। ऐसे में खाना छोड़ देना या सिर्फ चाय-बिस्किट के सहारे रहना रिकवरी को मुश्किल बना सकता है।
फ्लू से रिकवरी का डाइट प्लान!
फ्लू के दौरान डाइट का मकसद कोई दवा का विकल्प बनना नहीं है। बल्कि शरीर को पर्याप्त लिक्विड पदार्थ, प्रोटीन, ऊर्जा, विटामिन और मिनरल्स देना है। हल्का, आसानी से पचने वाला और घर का बना खाना इस समय सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है। आपकी डाइट (Flu Recovery Diet) से जुड़े सवालों को लेकर हमने बात की फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की, क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, चारू दुआ से....
फ्लू में रिकवरी के लिए हाइड्रेशन का महत्व?
न्यूट्रिशनिस्ट चारू के मुताबिक, फ्लू के दौरान बुखार और पसीने के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। नाक बहने, उल्टी या दस्त जैसी समस्या होने पर डिहाइड्रेशन का जोखिम और बढ़ जाता है। इसलिए दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहना जरूरी है। हालांकि आपको इस दौरान सादा पानी के अलावा गुनगुना पानी, पतला सूप और अन्य तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं। अगर तेज बुखार, उल्टी या दस्त के कारण शरीर से ज्यादा तरल पदार्थ निकल रहे हों तो डॉक्टर की सलाह से ORS लिया जा सकता है।
1. दिन 1 का डाइट प्लान
फ्लू के शुरुआती दिन में भूख कम होना सामान्य हो सकता है। इस समय बहुत भारी या तला-भुना भोजन करने के बजाय छोटे और हल्के मील लेना बेहतर रहेगा।
- सुबह: गुनगुना पानी और केला या पपीता
- नाश्ता: दलिया या हल्की पोहा
- मिड-मॉर्निंग: नारियल पानी
- लंच: मूंग दाल की खिचड़ी, थोड़ी सब्जी और दही
- शाम: वेजिटेबल सूप
- डिनर: मूंग दाल और नरम चावल या हल्की खिचड़ी
अगर गले में ज्यादा दर्द है तो भोजन बहुत गर्म या बहुत ठंडा लेने के बजाय नॉर्मल तापमान पर लें।
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2. दिन 2 का डाइट प्लान
दूसरे दिन शरीर को ऊर्जा के साथ प्रोटीन की भी जरूरत होती है। प्रोटीन शरीर की मरम्मत और सामान्य इम्यून फंक्शन के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है।
- सुबह: गुनगुना पानी और कोई नरम फल
- नाश्ता: मूंग दाल चीला या बेसन चीला
- मिड-मॉर्निंग: नारियल पानी या छाछ
- लंच: दाल, चावल, हल्की सब्जी और दही
- शाम: वेजिटेबल सूप या मुट्ठीभर भुना चना
- डिनर: दलिया या मूंग-मसूर की हल्की खिचड़ी
यदि दूध आपको आसानी से पचता है तो दूध या हल्दी वाला गुनगुना दूध भी लिया जा सकता है। हालांकि दूध को फ्लू का इलाज समझना सही नहीं है।
दिन 3 का डाइट प्लान
अब जब भूख थोड़ी लौटने लगे तो डाइट में अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियां शामिल करें। इनमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्व संतुलित आहार का हिस्सा हैं।
- सुबह: पपीता, केला या सेब
- नाश्ता: वेजिटेबल उपमा
- मिड-मॉर्निंग: नारियल पानी
- लंच: रोटी, मूंग दाल, लौकी/तोरी जैसी हल्की सब्जी और दही
- शाम: टमाटर या मिक्स वेजिटेबल सूप
- डिनर: वेजिटेबल खिचड़ी और दही
इस दौरान बहुत अधिक मसाले, लाल मिर्च और तेल वाली सब्जियों से बचना बेहतर हो सकता है, खासकर अगर गले या पेट में परेशानी हो।
दिन 4 का डाइट प्लान
रिकवरी के बीच प्रोटीन की मात्रा को धीरे-धीरे सामान्य डाइट के करीब लाया जा सकता है। शाकाहारी लोगों के लिए पनीर, दाल, मूंग, चना और सोया जैसे विकल्प उपयोगी हो सकते हैं।
- सुबह: गुनगुना पानी और फल
- नाश्ता: पनीर वाला हल्का पराठा या मूंग दाल चीला
- मिड-मॉर्निंग: छाछ
- लंच: 2 हल्की रोटियां, दाल, सब्जी और दही
- शाम: भुना चना या हल्का सूप
- डिनर: पनीर की हल्की सब्जी और रोटी या दलिया
अगर पनीर या दूध से पेट फूलता है या अपच होती है तो इसे जबरदस्ती खाने की जरूरत नहीं है। इसकी जगह दाल या अन्य शाकाहारी प्रोटीन स्रोत लिए जा सकते हैं।
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दिन 5 का डाइट प्लान
पांचवें दिन तक अगर बुखार और अन्य लक्षण कम हो रहे हैं तथा भूख बेहतर है, तो भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और सब्जियों का संतुलन बनाया जा सकता है।
- नाश्ता: ओट्स या वेजिटेबल पोहा
- मिड-मॉर्निंग: कोई मौसमी फल
- लंच: रोटी, दाल, सब्जी और दही
- शाम: मखाना या भुना चना
- डिनर: वेजिटेबल दलिया या खिचड़ी
एक साथ बहुत ज्यादा खाना खाने के बजाय दिन में 4-5 छोटे मील लेना कई लोगों के लिए आसान रहता है।
दिन 6 का डाइट प्लान
अगर कमजोरी कम हो रही है तो अब भोजन में थोड़ी विविधता बढ़ाई जा सकती है। साबुत अनाज, दालें, हरी सब्जियां, फल और डेयरी या उसके विकल्पों को संतुलित मात्रा में शामिल करें।
- सुबह: फल और गुनगुना पानी
- नाश्ता: वेजिटेबल दलिया या इडली
- लंच: रोटी, दाल, हरी सब्जी और दही
- शाम: फल या भुना चना
- डिनर: मूंग दाल, चावल और सब्जी
इस समय भी फास्ट फूड, बहुत तला भोजन और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों को सीमित रखना बेहतर है।
दिन 7 का डाइट प्लान
सातवें दिन तक अगर लक्षण काफी हद तक ठीक हो चुके हैं तो सामान्य संतुलित शाकाहारी भोजन की ओर लौट सकते हैं। लेकिन शरीर को पूरी तरह सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है, इसलिए अचानक बहुत भारी भोजन शुरू न करें।
- नाश्ता: पोहा/उपमा/इडली के साथ दही
- मिड-मॉर्निंग: मौसमी फल
- लंच: रोटी, दाल, सब्जी, सलाद और दही
- शाम: मखाना या भुना चना
- डिनर: हल्की खिचड़ी या दाल-रोटी-सब्जी
दिनभर पर्याप्त पानी पीना और पर्याप्त नींद लेना भी रिकवरी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एक नजर में पूरे सप्ताह का डाइट प्लान
| दिन | नाश्ता | दोपहर का भोजन | शाम का स्नैक | रात का भोजन |
|---|---|---|---|---|
| दिन 1 | दलिया/पोहा + केला | मूंग दाल की खिचड़ी + दही | वेजिटेबल सूप | मूंग दाल + नरम चावल |
| दिन 2 | मूंग दाल चीला | दाल + चावल + हल्की सब्जी + दही | सूप/भुना चना | दलिया या हल्की खिचड़ी |
| दिन 3 | वेजिटेबल उपमा | रोटी + मूंग दाल + लौकी/तोरी + दही | टमाटर सूप | वेजिटेबल खिचड़ी |
| दिन 4 | पनीर वाला हल्का पराठा/मूंग चीला | रोटी + दाल + सब्जी + दही | भुना चना | हल्की पनीर सब्जी + रोटी |
| दिन 5 | ओट्स/वेजिटेबल पोहा | रोटी + दाल + सब्जी + दही | मखाना/भुना चना | वेजिटेबल दलिया |
| दिन 6 | वेजिटेबल दलिया/इडली | रोटी + दाल + हरी सब्जी + दही | फल/भुना चना | मूंग दाल + चावल + सब्जी |
| दिन 7 | पोहा/उपमा/इडली + दही | रोटी + दाल + सब्जी + सलाद + दही | मखाना/फल | हल्की खिचड़ी या दाल-रोटी-सब्जी |
फ्लू में इन चीजों से करें परहेज
न्यूट्रिशनिस्ट, चारू दुआ के मुताबिक,फ्लू के दौरान कुछ खाद्य पदार्थ गले, पेट या पाचन तंत्र को परेशान कर सकते हैं। जिसमें बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन, अत्यधिक मसालेदार खाना, बहुत मीठे पैकेज्ड ड्रिंक और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को सीमित करना बेहतर है। शराब से पूरी तरह बचना चाहिए। कैफीन का बहुत अधिक सेवन भी हाइड्रेशन और नींद पर असर डाल सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की सहनशीलता अलग होती है, इसलिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को 'फ्लू में नुकसानदायक' मान लेना सही नहीं है।
क्या विटामिन C फ्लू में फायदेमंद है?
नींबू, आंवला, संतरा, अमरूद जैसे विटामिन C वाले फल संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन किसी एक फल या विटामिन को फ्लू का इलाज नहीं माना जा सकता। इसी तरह अदरक, तुलसी या मसालों से बना गर्म पेय गले को आराम दे सकता है, लेकिन यह एंटीवायरल इलाज का विकल्प नहीं है। फ्लू में आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ, पौष्टिक भोजन और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार सबसे महत्वपूर्ण हैं।
कब डॉक्टर की सलाह जरूरी है?
अगर तेज बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, बहुत ज्यादा कमजोरी या भ्रम की स्थिति हो, शरीर में पानी की गंभीर कमी के संकेत दिखाई दें या लक्षण लगातार बिगड़ते जाएं, तो केवल घरेलू डाइट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू के लक्षणों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है।
हालांकि कोई भी डाइट फ्लू को तुरंत खत्म नहीं करती। अच्छी डाइट शरीर को बीमारी से लड़ने और सामान्य स्थिति में लौटने के लिए जरूरी ऊर्जा और पोषण उपलब्ध कराने में मदद करती है।
