Heatwave mein Jukam: गर्मी का मौसम आते ही लोग आमतौर पर लू, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी परेशानियों से बचने की बात करते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक अजीब समस्या तेजी से देखने को मिल रही है- भीषण गर्मी (heatwave) के बीच लोगों को जुकाम, नाक बहना, छींकें आना और गले में खराश जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।
हीटवेव में नाक बहना क्या संकेत देता है- डॉक्टर से जानें
कई लोग हैरान हो जाते हैं कि जब मौसम इतना गर्म है, तब सर्दी-जुकाम कैसे हो सकता है। कुछ लोग इसे वायरल मानते हैं, तो कुछ AC या ठंडा पानी पीने को वजह समझते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हीटवेव और नाक बहने के बीच सीधा संबंध हो सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह हमेशा संक्रमण नहीं होता। कई बार शरीर गर्मी और तापमान में अचानक बदलाव पर इस तरह रिएक्ट करता है कि जुकाम जैसे लक्षण शुरू हो जाते हैं।
हीटवेव शरीर पर सिर्फ बाहर से असर नहीं करती
डॉ. तुषार तयाल (एसोसिएट डायरेक्टर - इंटरनल मेडिसिन, सीके बिरला हॉस्पिटल, गुरुग्राम) के मुताबिक, जब तापमान लगातार बहुत ज्यादा रहता है, तब शरीर सिर्फ पसीना ही नहीं बहाता बल्कि खुद को ठंडा रखने के लिए अंदर कई बदलाव भी करता है।
नाक के अंदर मौजूद म्यूकस मेम्ब्रेन यानी पतली नमी वाली परत भी इस दौरान प्रभावित होती है। तेज गर्मी और सूखी हवा की वजह से यह परत सूखने लगती है। ऐसे में शरीर खुद को बचाने के लिए ज्यादा म्यूकस बनाना शुरू कर देता है। यही कारण है कि कई लोगों की नाक बहने लगती है या बार-बार छींकें आने लगती हैं।
यानी यह एक तरह का ‘डिफेंस मैकेनिज्म’ होता है। शरीर कोशिश करता है कि नाक के अंदर नमी बनी रहे ताकि धूल, गर्म हवा और एलर्जन सीधे अंदर न जा सकें।
AC और बाहर की गर्मी का झटका बढ़ा देता है परेशानी
आजकल ज्यादातर लोग तेज धूप से निकलकर सीधे बहुत ठंडे AC कमरे में पहुंच जाते हैं। यही अचानक तापमान बदलना कई बार नाक और गले की समस्या को ट्रिगर कर देता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि जब शरीर 44-45 डिग्री तापमान से अचानक 18-20 डिग्री वाले कमरे में जाता है, तो नाक की ब्लड वेसल्स तेजी से सिकुड़ती और फैलती हैं। इससे नाक बहना, सिर भारी लगना और गले में खराश जैसी दिक्कत शुरू हो सकती है।
अगर AC की सफाई नियमित न हो, तो उसके अंदर जमा धूल, फंगस और एलर्जन भी एलर्जी जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं। ऐसे में व्यक्ति को लगता है कि उसे जुकाम हो गया है, जबकि असल में यह एलर्जिक रिएक्शन होता है।
हर नाक बहना वायरल नहीं होता
नोएडा के फेलिक्स हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग की डॉ. अंशुमाना सिन्हा का कहना है कि गर्मियों में होने वाली हर सर्दी वायरल संक्रमण नहीं होती। कई बार यह एलर्जिक राइनाइटिस या मौसम के प्रति शरीर की संवेदनशील प्रतिक्रिया हो सकती है।
अगर नाक बहने के साथ तेज बुखार, शरीर दर्द और कमजोरी नहीं है, तो संभव है कि यह संक्रमण नहीं बल्कि गर्मी और तापमान बदलाव का असर हो।
हालांकि अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें, सांस लेने में तकलीफ हो, तेज बुखार आए या गले में बहुत ज्यादा दर्द हो, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए। क्योंकि गर्मियों में भी वायरल इंफेक्शन पूरी तरह खत्म नहीं होते।
धूल और प्रदूषण भी बढ़ा रहे हैं समस्या
गर्मियों में हवा ज्यादा सूखी हो जाती है। कई शहरों में धूल, प्रदूषण और गर्म हवाएं मिलकर सांस की नलियों और नाक को ज्यादा संवेदनशील बना देती हैं।
डॉ. तुषार तयाल का कहना है कि हीटवेव के दौरान वातावरण में मौजूद छोटे प्रदूषक कण ज्यादा तेजी से शरीर में प्रवेश करते हैं। इससे एलर्जी, छींकें और नाक बंद होने जैसी परेशानी बढ़ सकती है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी, अस्थमा या साइनस की समस्या है, उनमें यह दिक्कत ज्यादा देखने को मिलती है।
बार-बार ठंडा पीना भी बन सकता है वजह
कई लोग गर्मी से राहत पाने के लिए बार-बार बर्फ वाला पानी, कोल्ड ड्रिंक्स या बहुत ठंडी चीजें लेते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि अत्यधिक ठंडी चीजें गले और नाक की संवेदनशील परतों को प्रभावित कर सकती हैं।
खासतौर पर जब शरीर बहुत गर्म हो और उसी समय बेहद ठंडी चीज ली जाए, तो कुछ लोगों में गले की सूजन और नाक बहने जैसी समस्या शुरू हो सकती है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
डॉ. अंशुमाला सिन्हा के अनुसार कुछ लोगों में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है, जैसे -
- अस्थमा या एलर्जी के मरीज
- छोटे बच्चे
- बुजुर्ग
- साइनस की समस्या वाले लोग
- बहुत ज्यादा AC में रहने वाले लोग
- धूल या प्रदूषण वाले वातावरण में काम करने वाले लोग
इन लोगों को तापमान में अचानक बदलाव से खासतौर पर बचने की सलाह दी जाती है।
इस परेशानी से बचने के आसान तरीके
विशेषज्ञ कहते हैं कि कुछ छोटी सावधानियां अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।
क्या करें
- धूप से आने के तुरंत बाद बहुत ठंडे कमरे में न जाएं
- AC का तापमान बहुत कम न रखें
- AC और कूलर की नियमित सफाई कराएं
- पर्याप्त पानी पीते रहें ताकि शरीर में नमी बनी रहे
- धूल वाली जगहों पर मास्क पहनें
- बहुत ज्यादा ठंडी चीजें लगातार न लें
- घर में हल्की वेंटिलेशन बनाए रखें
- अगर एलर्जी की समस्या है तो डॉक्टर की सलाह से दवाएं लें
डॉ. तुषार तयाल का कहना है कि शरीर को गर्मी और ठंड के बीच संतुलन बनाने का समय देना जरूरी है। अचानक तापमान बदलना ही कई बार इस तरह की परेशानियों की सबसे बड़ी वजह बन जाता है।
कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है
अगर नाक बहने के साथ तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न, लगातार खांसी या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे सामान्य मौसमी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञ कहते हैं कि हीटवेव के दौरान शरीर पहले से ही तनाव में होता है। ऐसे में छोटी समस्या भी जल्दी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए लंबे समय तक लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
