Benefits Of Crying In Hindi: अक्सर हम जब दुखी होते हैं, तो आंखों से आंसू निकलते हैं। वहीं, बहुत से लोगों की आंखों से खुश होने पर भी आंसू गिरते हैं। ऐसा होना पूरी तरह सामान्य है। आपको बता दें कि रोना कोई बुरी चीज नहीं है। यह सेहत के लिहाज से भी लाभकारी होता है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है, आयुर्वेद में रोना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है। यह पूरी तरह स्वस्थ है। जब हम रोते हैं, तो यह हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करता है। यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने से लेकर हमारे दिल को सेहतमंद रखने तक में बहुत लाभकारी है।
Benefits Of Crying In Hindi
हेल्थ इन्फ्लूएंसर और आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. चैतली रीठौड़ के अनुसार, रोने से आपके शरीर के आंतरिक अंगों को आराम मिलता है। आयुर्वेद की मानें तो आंसू 13 अधरानिया वेगा में से एक है। अधारियाना वेगा का अर्थ है वे आग्रह जिन्हें दबाया नहीं जाना चाहिए। डकार, पेशाब, छींक, खांसी, उल्टी, शौच, प्यास, जम्हाई, भूख, श्वास, आंसू, नींद, पादना, वीर्य का स्खलन जैसे 13 अधारियाना वेग हैं। इन आग्रहों या वेग को किसी भी तरह दबाया नहीं जाना चाहिए। ये सभी क्रियाएं स्वस्थ शरीर के लिए बहुत आवश्यक हैं। रोना सेहत के लिए कैसे लाभकारी है, इस लेख में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं....
सेहत के लिए रोना कैसे लाभकारी होता है- How Crying Is Good For Healthy In Hindi
डॉ. चैतली के अनुसार, जब आप रोते हैं तो शरीर में आंतरिक रूप से कई क्रियाएं होती हैं। यह सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है जैसे,
- रोना शरीर से तनाव हार्मोन और टॉक्सिन को बाहर निकालकर भावनात्मक राहत प्रदान कर सकता है।
- ऐसा करने से आपका हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है। यह ब्लड शुगर और हाई बीपी को कंट्रोल रखता है।
- रोने से सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है।
- तनाव कई रोग स्थितियों का कारण बन सकता है, रोने से उस रोगों को रोका जा सकता है।
- रोने से एंडोर्फिन नामक अच्छा महसूस कराने वाले हार्मोन का उत्पादन बेहतर हो सकता है।
- रोने से तनाव दूर होता है और भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा मिलता है, जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है।
अगर रोना आने पर आप इसे आसुंओं को रोकते हैं तो इसके सेहत पर क्या प्रभाव पड़ते हैं?
अगर आप रोने की भावना को दबाते हैं, तो ऐसा करने से आपको कई बदलाव नोटिस हो सकते हैं। आंसुओं को जबरन दबाने के लक्षण यहां दिए गए हैं,
- रुचि कम होना - स्वादहीनता, अरुचि, भोजन के प्रति रुचि खत्म होना
- भ्रम - चक्कर, भ्रम
- गुलमा - पेट के ट्यूमर, पेट का फूलना, पेट का भरा होना।
यह भी ध्यान रखें कि रोना कोई व्यवहारिक पैटर्न नहीं होना चाहिए, अगर किसी व्यक्ति को बार-बार या अधिक रोना आता है, तो यह भी सामान्य नहीं है, उस स्थिति में आप किसी डॉक्टर की मदद ले सकते हैं।
