Dhanteras And Health Connection: हर साल दीपावली का त्यौहार धनतेरस से शुरू होता है। इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन या नई चीजें खरीदते हैं ताकि घर में लक्ष्मी का आगमन हो और जीवन में समृद्धि आए। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि धनतेरस शब्द में छिपा ‘धन’ सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है? आयुर्वेद के अनुसार असली धन है - आपका स्वास्थ्य।
Dhanteras And Health Connection (फोटो: AI)
आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि धनतेरस का दिन सिर्फ खरीदारी का नहीं, बल्कि अपने तन, मन और आत्मा को स्वस्थ रखने का संदेश देता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है, जिन्होंने मानवता को 'आयुर्वेद' का ज्ञान दिया था। आइए जानें कैसे धनतेरस असल में हमारे स्वास्थ्य, दीर्घायु और पारिवारिक सुख से जुड़ा हुआ है।
धनतेरस का असली अर्थ क्या होता है?
डॉ. चंचल की मानें तो आयुर्वेद के अनुसार, ‘धनतेरस’ शब्द दो भागों से बना है धन और तेरस। यह दिन कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। उनके हाथों में एक ओर अमृत कलश और दूसरी ओर आयुर्वेद का ग्रंथ था। इसलिए धनतेरस सिर्फ सोना-चांदी खरीदने का दिन नहीं, बल्कि आरोग्य, स्वास्थ्य और दीर्घायु का प्रतीक है।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद के जनक माना जाता है, और यही कारण है कि इस दिन को स्वास्थ्य और अच्छे जीवन की शुरुआत का शुभ समय माना गया है।
धनतेरस और स्वास्थ्य का संबंध क्या है?
आज के समय में लोगों की जिंदगी में तनाव, काम का बोझ और अनियमित दिनचर्या इतनी बढ़ गई है कि स्वास्थ्य पीछे छूट गया है। डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं, 'आपका स्वास्थ्य ही आपका असली धन है। जब तन और मन दोनों स्वस्थ हों तभी पैसा और समृद्धि का महत्व होता है। धनतेरस हमें यही सिखाता है कि हमें अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।'
आयुर्वेद के अनुसार शरीर ही सभी धर्म-कर्म का आधार है। अगर शरीर अस्वस्थ है तो न खुशी टिकती है, न सफलता।
इसीलिए भगवान धन्वंतरि की पूजा कर हम उनसे आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद मांगते हैं।
परंपरा में छिपा स्वास्थ्य संदेश
पुराने समय में लोग धनतेरस पर तांबे, पीतल या चांदी के बर्तन खरीदते थे। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इन धातुओं को खरीदने के पीछे भी आयुर्वेदिक कारण हैं,
- तांबे के बर्तन में रखा पानी बैक्टीरिया को खत्म करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।
- चांदी में प्राकृतिक ठंडक होती है, जो शरीर के तापमान को संतुलित रखती है।
- पीतल भी पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करता है।
इस तरह धनतेरस पर इन धातुओं को खरीदना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य में निवेश था।
संतान सुख और मानसिक समृद्धि का प्रतीक
धनतेरस का अर्थ केवल भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि मानव संपत्ति यानी संतान सुख से भी जुड़ा है। डॉ. चंचल शर्मा बताती हैं कि इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा संतान की खुशहाली और परिवार की समृद्धि के लिए की जाती है। क्योंकि एक स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली ही अच्छे परिवार और योग्य संतान का आधार बनती है। आयुर्वेद के नजरिए से भी यही कहा गया है कि जब मन, मस्तिष्क और शरीर संतुलित हों, तभी घर में वास्तविक सुख और समृद्धि आती है।
आधुनिक समय में धनतेरस का स्वास्थ्य संदेश
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर बीमारियां तनाव, गलत खानपान और नींद की कमी से जुड़ी हैं।
ऐसे में धनतेरस हमें याद दिलाता है कि 'धन सिर्फ बैंक में नहीं, शरीर और मन में भी होना चाहिए।' इस साल जब आप धनतेरस पर कुछ खरीदें, तो अपने स्वास्थ्य में निवेश करें। जैसे,
- अपने लिए हेल्थ चेकअप कराएं।
- योग या ध्यान की शुरुआत करें।
- शरीर को डिटॉक्स करने वाली आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाएं।
- और सबसे जरूरी तनाव को कम करें।
भगवान धन्वंतरि से यही प्रार्थना करें कि आपके घर में संतुलन, शांति और स्वास्थ्य का दीपक सदा जलता रहे।
असली ‘धन’ है स्वस्थ जीवन
धनतेरस हमें यह सिखाता है कि सोना-चांदी का चमकना तब तक मायने नहीं रखता जब तक हमारा शरीर और मन स्वस्थ न हो। डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं 'धनतेरस का पर्व केवल धन प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और पारिवारिक सुख के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।'
इसलिए इस बार दीपावली की शुरुआत सिर्फ खरीदारी से नहीं, बल्कि सेहत की देखभाल के संकल्प से करें। भगवान धन्वंतरि के आशीर्वाद से आपके जीवन में आयु, आरोग्य और समृद्धि तीनों का संगम हो यही सच्चा धनतेरस है।
