Coffee imapct on Gut Health: सुबह आंख खुली नहीं कि कॉफी याद आने लगी। किसी को बेड टी चाहिए तो किसी के लिए कॉफी का पहला कप ही दिन का ‘स्टार्ट बटन’ है। कप हाथ में आते ही लगता है कि अब दिमाग काम करेगा और नींद भी भाग जाएगी। लेकिन क्या कॉफी पीने के बाद आपका पेट फूलता है, खट्टी डकार आती है, बेचैनी होती है या दोपहर तक फिर से शरीर थका-थका महसूस करने लगता है?
क्या कॉफी से बिगड़ता है पाचन तंत्र, जानें डॉ. सेठी ने किन बातों पर किया अलर्ट
अगर हां, तो जरूरी नहीं कि कॉफी आपके लिए खराब हो। हो सकता है कि गड़बड़ी उसे पीने के तरीके में हो।
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने अपने एक वीडियो में कॉफी से जुड़ी ऐसी सात आदतों का जिक्र किया है, जो पेट, नींद और मेटाबॉलिज्म पर असर डाल सकती हैं। अच्छी बात यह है कि इनके लिए आपको कॉफी से ब्रेकअप करने की जरूरत नहीं। कप वही रह सकता है, बस कुछ आदतें बदलनी होंगी।
उठते ही खाली पेट कॉफी पीते हैं
कई लोगों को सुबह में अलार्म बंद करने के बाद सीधे फोन देखने और इसी के साथ कॉफी बनाने की भी आदत होती है। पानी और नाश्ता तो इसके बाद में याद आता है। खासकर इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वाले लोग लंबे समय तक केवल ब्लैक कॉफी पर टिके रहते हैं।
लेकिन खाली पेट कॉफी हर किसी को सूट नहीं करती। सेंसिटिव पेट वाले लोगों को इसके बाद जलन, खट्टी डकार, मितली या पेट में हलचल महसूस हो सकती है। अगर आपकी सुबह भी अक्सर एसिडिटी से शुरू होती है, तो एक छोटा प्रयोग करें। पहले पानी पिएं। संभव हो तो हल्का नाश्ता करें और उसके बाद कॉफी लें। कुछ दिनों में शरीर खुद बता देगा कि यह बदलाव काम कर रहा है या नहीं।
कॉफी है या कप में छिपी मिठाई
एक चम्मच चीनी, थोड़ा कैरेमल सिरप, ऊपर से व्हिप्ड क्रीम और चॉकलेट सॉस। सुनने में स्वादिष्ट लगता है, लेकिन अब यह सिर्फ कॉफी नहीं रही। यह लगभग एक मीठी डेजर्ट ड्रिंक बन चुकी है।
ऐसी कॉफी कभी-कभार ली जाए तो अलग बात है, लेकिन इसे रोज की आदत बनाना ठीक नहीं। ज्यादा चीनी से पहले अचानक एनर्जी मिलती है और कुछ समय बाद उतनी ही तेजी से थकान लौट सकती है। यही वह समय है जब दोबारा कॉफी या कुछ मीठा खाने का मन करता है।
अगर चीनी एकदम बंद करना मुश्किल लग रहा है तो हर सप्ताह उसकी मात्रा थोड़ी कम करें। इसके अलावा, स्वाद के लिए दालचीनी डाल सकते हैं। कुछ दिनों बाद कम मीठी कॉफी भी सामान्य लगने लगेगी।
पैकेज्ड क्रीमर का लेबल पढ़ा है कभी
कॉफी को क्रीमी बनाने वाला पाउडर या लिक्विड क्रीमर देखने में दूध जैसा लग सकता है। लेकिन क्या आपने कभी उसके पैकेट के पीछे लिखी सामग्री पढ़ी है?
कई क्रीमर में अतिरिक्त चीनी, रिफाइंड ऑयल, फ्लेवर और दूसरे एडिटिव्स हो सकते हैं। यानी घर की सादी कॉफी भी इनके कारण अल्ट्रा-प्रोसेस्ड ड्रिंक में बदल सकती है। अगली बार क्रीमर खरीदते समय केवल सामने लिखे ‘लो फैट’ या ‘शुगर फ्री’ पर भरोसा न करें। पीछे का लेबल भी देखें। सामान्य दूध या बिना एडेड शुगर वाला प्लांट-बेस्ड मिल्क ज्यादा सरल विकल्प हो सकता है।
एक कप कब चार कप बन गया, पता ही नहीं चला
सुबह की कॉफी समझ आती है। लेकिन उसके बाद ऑफिस पहुंचकर एक कप, मीटिंग के बीच दूसरा और शाम की थकान मिटाने के लिए तीसरा- यह सिलसिला कई बार बिना सोचे चलता रहता है।
शरीर को जरूरत से ज्यादा कैफीन मिलने पर घबराहट, सिरदर्द, हाथों में कंपन, पेट खराब होने या दिल की धड़कन तेज होने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। यहां कप गिनने के साथ कप का आकार देखना भी जरूरी है। घर का छोटा कप और कैफे का बड़ा मग- कहीं से भी एक बात नहीं हो सकती।
कॉफी पीने के बाद अगर आप शांत और चुस्त महसूस करने की जगह परेशान और बेचैन हो रहे हैं, तो समझ जाएं कि शरीर आपको आज के लिए कॉफी की डोज पूरी होने का संकेत दे रहा है।
क्या शाम की कॉफी से रात को नींद नहीं आती
मुझे तो कॉफी पीकर भी नींद आ जाती है।- यह बात आपने कही या सुनी जरूर होगी। लेकिन सवाल केवल नींद आने का नहीं, अच्छी और गहरी नींद मिलने का भी है।
देर शाम या रात में ली गई कॉफी नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकती है। आप सो तो जाते हैं, लेकिन सुबह शरीर पूरी तरह तरोताजा महसूस नहीं करता। फिर नींद भगाने के लिए दोबारा कॉफी चाहिए और यही चक्र चलता रहता है।
अगर सुबह उठकर भी थकान रहती है, तो एक सप्ताह शाम की कॉफी बंद करके देखें। उसकी जगह गर्म दूध, हर्बल टी या कोई कैफीन-फ्री ड्रिंक ले सकते हैं।
कॉफी पुरानी तो नहीं
हम दूध की एक्सपायरी डेट तुरंत देखते हैं, लेकिन कॉफी का पैकेट कई हफ्तों तक खुला पड़ा रहता है। नमी, हवा और गर्मी कॉफी की ताजगी तथा स्वाद को खराब कर सकती है।
कॉफी खरीदते समय भरोसेमंद ब्रांड के साथ पैकिंग और एक्सपायरी डेट जरूर देखें। घर में इसे चूल्हे के पास या खुले डिब्बे में न रखें। एयरटाइट कंटेनर चुनें और चम्मच हमेशा सूखा इस्तेमाल करें। कॉफी से अजीब गंध आ रही हो या स्वाद अचानक बदल गया हो, तो पैकेट बदल लेना ही समझदारी रहेगी।
नींद और नाश्ते की जगह कॉफी लेना सबसे बड़ी गलती
रात को देर तक काम किया, सुबह नींद पूरी नहीं हुई और नाश्ता करने का समय भी नहीं मिला। समाधान क्या निकाला? एक स्ट्रॉन्ग कॉफी।
कभी-कभार ऐसा हो जाए तो अलग बात है। लेकिन रोज कॉफी के सहारे शरीर को चलाना ठीक नहीं। कैफीन थोड़ी देर के लिए थकान दबा सकती है, शरीर की असली जरूरत खत्म नहीं कर सकती। नींद कम है तो शरीर को नींद चाहिए। भूख लगी है तो भोजन चाहिए। लगातार कॉफी से इन संकेतों को दबाना आपको भीतर से और थका सकता है।
तो क्या कॉफी छोड़ देनी चाहिए
हर किसी के लिए ऐसा करना जरूरी नहीं। पहले यह समझें कि आपका शरीर कॉफी पर कैसे प्रतिक्रिया देता है। एक छोटी-सी कॉफी डायरी बना सकते हैं। इसमें लिखें:
- कॉफी किस समय पी?
- खाली पेट ली या खाने के बाद?
- उसमें कितनी चीनी डाली?
- दिनभर में कुल कितने कप हुए?
- बाद में एसिडिटी, बेचैनी या पेट फूलने की शिकायत हुई?
- रात की नींद कैसी रही?
कुछ ही दिनों में आपको अपना पैटर्न दिखाई देने लगेगा। कॉफी का मजा तभी है, जब वह दिन को बेहतर बनाए- पेट खराब करके, नींद चुराकर या थकान छिपाकर नहीं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। लगातार एसिडिटी, पेट दर्द, तेज धड़कन या नींद की परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
