Vasant Ritu Mein Healthy Kaise Rahein: वसंत ऋतु आते ही मौसम सुहावना हो जाता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यही समय शरीर में कफ दोष बढ़ने का भी होता है। इसी कारण कई लोगों को इस मौसम में एलर्जी, मुंहासे, शरीर में भारीपन और पाचन से जुड़ी परेशानियां महसूस होने लगती हैं। हेल्थ इन्फ्लुएंसर और आयुर्वेदिक डॉक्टर चैतली राठौर के मुताबिक, असल समस्या मौसम नहीं बल्कि हमारी बदलती लाइफस्टाइल होती है। अगर हम अपनी दिनचर्या और खान-पान में छोटे-छोटे बदलाव कर लें, तो इस मौसम में भी शरीर हल्का, एक्टिव और एनर्जेटिक बना रह सकता है। आइए जानते हैं वसंत ऋतु में स्वस्थ रहने के आसान आयुर्वेदिक तरीके।
वसंत ऋतु में स्वस्थ कैसे रहें (PC- ai)
सुबह जल्दी उठें और शरीर को एक्टिव रखें
आयुर्वेद कहता है कि वसंत ऋतु में कफ स्वाभाविक रूप से बढ़ता है, जिससे सुस्ती और आलस ज्यादा महसूस हो सकता है। इसलिए सुबह 6 बजे से पहले उठने की आदत फायदेमंद मानी जाती है। जल्दी उठने से शरीर में ताजगी बनी रहती है और दिनभर काम करने की ऊर्जा मिलती है। रोजाना हल्की एक्सरसाइज, योग या तेज चलना शरीर को एक्टिव रखता है और मेटाबॉलिज्म बेहतर बनाता है। इससे शरीर में जमा अतिरिक्त कफ धीरे-धीरे कम होने लगता है और भारीपन महसूस नहीं होता।
हल्का और गर्म भोजन पाचन को रखे दुरुस्त
इस मौसम में बहुत ज्यादा तला-भुना, भारी और ऑयली खाना पचने में मुश्किल कर सकता है। आयुर्वेद के अनुसार वसंत ऋतु में हल्का, गर्म और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर रहता है। मूंग दाल, जौ और हल्की सब्जियां पेट के लिए अच्छी मानी जाती हैं। खाने में कड़वा, कसैला और थोड़ा तीखा स्वाद शामिल करने से कफ संतुलित रहता है और ब्लोटिंग या सुस्ती जैसी समस्या कम हो सकती है। जब खाना हल्का होगा तो शरीर भी हल्का महसूस करेगा।
गुनगुना पानी और सही रूटीन से मिलती है ताजगी
दिन की शुरुआत गुनगुना पानी पीकर करना एक आसान लेकिन असरदार आदत है। यह शरीर को अंदर से साफ रखने में मदद करता है और पाचन को बेहतर बनाता है। इसके साथ ही दिनभर थोड़ा-बहुत एक्टिव रहना जरूरी है। ज्यादा देर तक बैठे रहने से शरीर में जड़ता महसूस हो सकती है। बीच-बीच में टहलना या हल्की स्ट्रेचिंग करना शरीर को चुस्त बनाए रखता है।
दिन में सोने से बढ़ सकती है सुस्ती
वसंत ऋतु में दिन के समय ज्यादा सोना सही नहीं माना जाता। आयुर्वेद के अनुसार इससे कफ बढ़ सकता है, जिससे पाचन धीमा हो सकता है और वजन भी बढ़ सकता है। दिन में ज्यादा सोने से कई बार सिर भारी लगता है और साइनस की समस्या भी बढ़ सकती है। बेहतर है कि दिन में खुद को व्यस्त रखें और रात में समय पर सोने की आदत डालें, ताकि शरीर का संतुलन बना रहे।
आयुर्वेदिक स्नान से त्वचा को मिल सकता है नेचुरल ग्लो
इस मौसम में स्किन से जुड़ी परेशानियां भी देखने को मिलती हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक स्नान फायदेमंद हो सकता है। पलाश या टेसू के फूल को पानी में उबालकर उससे नहाने की परंपरा काफी पुरानी है। यह तरीका त्वचा को साफ रखने में मदद करता है और खुजली या इंफेक्शन की परेशानी कम कर सकता है। इससे स्किन में हल्का निखार भी देखने को मिल सकता है।
ज्यादा मीठा, डेयरी और ठंडी चीजों से रखें दूरी
वसंत ऋतु में ज्यादा मीठा, डेयरी प्रोडक्ट, ठंडे ड्रिंक या आइसक्रीम जैसी चीजें कफ को बढ़ा सकती हैं। इससे एलर्जी, सर्दी-जुकाम और पाचन से जुड़ी समस्या हो सकती है। जरूरत से ज्यादा खाने की आदत भी शरीर में सुस्ती ला सकती है। इसलिए इस मौसम में संतुलित मात्रा में खाना और ओवरईटिंग से बचना बेहतर माना जाता है।
छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर वसंत ऋतु में खुद को हेल्दी और एनर्जेटिक रखना आसान हो सकता है। आयुर्वेद भी यही कहता है कि इलाज से बेहतर बचाव होता है। अगर आप मौसम के हिसाब से अपनी लाइफस्टाइल ढाल लेते हैं, तो शरीर लंबे समय तक फिट और संतुलित बना रह सकता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
