हमारे देश में आत्महत्या का नंबर साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों की मानें तो रोजाना लगभग 400 लोग आत्महत्या करते हैं, जबकि साल में ये आंकड़ा 1.7 लाख तक पहुंच गया है। वहीं इस आत्महत्या के कुल आंकड़े में युवाओं (18 से 45 साल) की संख्या काफी ज्यादा है। देशभर में छात्रों की आत्महत्या के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। लगातार बढ़ता पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, अकेलापन और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ युवाओं को आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर कर रही हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एम्स दिल्ली ने हाल ही में “Never Alone AI App” लॉन्च किया है। आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस से युक्त इस एप की मदद से आत्महत्या को रोकने में मदद मिल सकती है।
क्या है उद्देश्य?
इस ऐप को लॉन्च करने का उद्देश्य छात्रों को लगातार बढ़ते अकेलेपन और तनाव से बाहर निकालना है। इसकी मदद से उनकी समय रहते काउंसलिंग करके मार्गदर्शन किया जा सकेगा। यह ऐप एआई (AI) तकनीक पर आधारित है। ये ऐप यूजर की बातचीत, मूड और सवालों को समझकर तुरंत सहायता के रूप में जवाब देता है। इसके साथ ही ये मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न संसाधन भी उपलब्ध कराता है।
कब हुआ लॉन्च?
दिल्ली एम्स ने ग्लोबल सेंटर आफ इंटीग्रेटिव हेल्थ की मदद से विशेष रूप से मेडिकल छात्रों के लिए व्हाट्सएप आधारित “Never Alone AI App” तैयार किया है, जिसे 11 सितंबर 'विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस' के मौके पर लांच किया गया। संस्थान की मानें तो ये ऐप अगले महीने से दिल्ली एम्स, भुवनेश्वर एम्स और मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान एवं विज्ञान संस्थान एवं हॉस्पिटल (इहबास) के छात्रों के लिए पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध होगा।
24x7 सपोर्ट सिस्टम
छात्रों की मदद के लिए 'Never Alone AI App' 24 घंटे उपलब्ध रहेगा। किसी भी समय छात्र इस ऐप के जरिए अपनी चिंता, तनाव या परेशानी साझा कर सकते हैं AI के जरिए छात्रों को तुरंत मदद करने की योजना बनाई गई है। ये ऐप केवल AI की मदद तक सीमित नहीं है। बल्कि जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिकों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से भी आपको जोड़ सकता है।
