Cancer Ka khatra: एक नई वैश्विक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दुनिया कैंसर के एक बड़े संकट की ओर बढ़ रही है। The Lancet और Global Burden of Disease Study की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 मेंदुनियाभर में 18.5 मिलियन कैंसर के नए मामले और 10.4 मिलियन मौतें दर्ज की गईं।
दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर (iStock)
2050 तक कैंसर के नए मामलों की संख्या 30.5 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, और वैश्विक मृत्यु दर में 75% की वृद्धि हो सकती है।
यह रिपोर्ट , जिसमें 204 देशों और क्षेत्रों में 47 प्रकार के कैंसर का विश्लेषण किया गया है। इसमें 1990 से 2050 तक के रुझानों को दर्शाया गया है। सबसे ज्यादा जानलेवा कैंसर हैं ट्रैकिया, ब्रोंकस और फेफड़ों का कैंसर,ब्रेस्ट कैंसर, पेट का कैंसर,प्रोस्टेट कैंसर सर्वाइकल कैंसर है रिपोर्ट बताती है कि 42% कैंसर मामलों को रोका जा सकता है, यदि तंबाकू, शराब, मोटापा और हाई ब्लड शुगर जैसे जोखिम कारकों पर नियंत्रण किया जाए।
कैंसर के मामले में भारत की स्थिति
- भारत कैंसर से मौतों के मामले में 16वें स्थान पर है।
- 2023 में 14 लाख नए कैंसर मरीज मिले, जो 1990 की तुलना में 26.4% ज़्यादा है।
- मौतों में भी 21.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- भारत में सबसे जानलेवा कैंसर: फेफड़ों, ब्रेस्ट, ओवेरियन, मुँह और पेट के कैंसर।
कैंसर के क्या प्रमुख कारण हैं
- तंबाकू: कैंसर की 20% मौतें तंबाकू के कारण होती हैं।
- गलत खान-पान: हेल्दी नहीं खाना कैंसर बढ़ाता है।
- असुरक्षित सेक्स और संक्रमण: कुछ वायरस जैसे HPV गर्भाशय कैंसर कर सकते हैं।
- अधिक शराब पीना: खासकर पुरुषों में कैंसर का खतरा बढ़ता है।
- ज्यादा शुगर: ब्लड शुगर ज्यादा होने से कैंसर का खतरा बढ़ता है।
- प्रदूषण और खतरनाक काम: धुआं, रसायन और काम की जगह से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।
The Lancet में प्रकाशित “Global Burden of Disease Study 2023” के अनुसार, 2023 में दुनियाभर में 18.5 मिलियन कैंसर के नए मामले और 10.4 मिलियन मौतें दर्ज की गईं। 57.9% मामले और 65.8% मौतें निम्न से मध्यम आय वाले देशों में हुईं। कैंसर, हृदय रोग के बाद दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। 2023 में 4.33 मिलियन मौतें केवल जोखिम कारकों (जैसे धूम्रपान, शराब, मोटापा आदि) के कारण हुईं।
1990 से 2023 के बीच जोखिम-आधारित कैंसर मौतों में 72.3% की बढ़ोतरी हुई। वहीं 2050 तक कैंसर के मामले 30.5 मिलियन और मौतें 18.6 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 2050 तक कैंसर से होने वाली मौतों में उच्च आय वाले देशों में वृद्धि 42.8% होगी, जबकि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में यह 90.6% तक हो सकती है। हालांकि उम्र के अनुसार मृत्यु दर में 5.6% की गिरावट देखी गई है, लेकिन यह संयुक्त राष्ट्र के SDG लक्ष्य 3.4 (2015 से 2030 तक 30 से 70 वर्ष की आयु में गैर-संक्रामक रोगों से मृत्यु में एक-तिहाई की कमी) को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो कैंसर से होने वाला नुकसान हमारे स्वास्थ्य सिस्टम को झकझोर सकता है। रोकथाम, समय पर जांच, इलाज की सुविधाएं, और जागरूकता ये चार प्रमुख उपाय हैं जिन पर सरकारों और समाज को मिलकर काम करना होगा।
