Yemen Houthi Rebels: यमन से आई एक ताजा और बेहद चिंताजनक खबर ने पूरी दुनिया के देशों और अर्थशास्त्रियों की नींद उड़ा दी है। ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने यमन के ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मोखा बंदरगाह (Mokha Port) पर अपना पूर्ण कब्जा जमा लिया है।
लाल सागर में बढ़ा महासंकट (फोटो: एआई इमेज)
एपी के मुताबिक 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद यह हुती विद्रोहियों की अब तक की सबसे बड़ी प्रादेशिक बढ़त मानी जा रही है। इस घटनाक्रम ने न केवल यमन में एक बार फिर से भयावह गृहयुद्ध के मुहाने पर खड़े होने की आशंका पैदा कर दी है, बल्कि वैश्विक व्यापार और समुद्री जहाजों की सुरक्षा पर भी एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: PM मोदी ने पुतिन को दी 1,330 दोहों वाली किताब, शासन-कूटनीति का अनमोल ज्ञान; जानिए क्यों चुना ये तोहफा
मोखा बंदरगाह का भौगोलिक और रणनीतिक महत्व
मोखा पोर्ट लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले 'बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य' (Bab el-Mandeb Strait) से महज 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग 12% हिस्सा और भारी मात्रा में कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है।
हाल के दिनों में, जब ईरान के साथ तनाव के कारण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, तब लाल सागर का यह रास्ता अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति के लिए एक प्रमुख जीवनरेखा बन गया था। अब मोखा पर कब्जा हो जाने से हुती विद्रोही सीधे तौर पर इस पूरे क्षेत्र की नाकेबंदी करने और लाल सागर से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों को निशाना बनाने की स्थिति में आ गए हैं।
जमीन पर क्या हैं मौजूदा हालात?
स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के अनुसार, मोखा शहर की सड़कों पर हुती विद्रोहियों के हथियारबंद गाड़ियों के काफिले देखे जा रहे हैं। शहर के सभी बाजार और दुकानें पूरी तरह बंद हैं। सुरक्षा खतरों को देखते हुए आम नागरिक और अस्पताल के डॉक्टर तक दक्षिण की ओर स्थित 'अदन' शहर की तरफ भाग रहे हैं, जिस पर सऊदी समर्थित यमन सरकार का नियंत्रण है।
हुती विद्रोहियों ने हाल ही में तैज (Taiz) प्रांत के अल-शाकिरा इलाके पर भी नियंत्रण हासिल किया था, जो यमन सरकार की सेना के लिए आपूर्ति का मुख्य रास्ता था। पहाड़ी इलाका होने के कारण हुतियों को यहां से यमन के पश्चिमी तट पर सीधी निगरानी रखने का सामरिक लाभ मिल गया है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हुती अब पानी में बारूदी सुरंगे (Naval Mines) बिछाकर समुद्री यातायात को पूरी तरह ठप्प कर सकते हैं।
ईरान, सऊदी अरब और वैश्विक शक्तियों पर इसका क्या असर होगा?
- हुतियों की इस सफलता को ईरान की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी कूटनीतिक व सैन्य तनातनी के बीच ईरान को लाल सागर में एक नया 'लीवरेज' या दबाव बनाने का हथियार मिल गया है।
- यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहे सऊदी अरब के लिए यह सीधी चुनौती है। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह शांति का समर्थक है, लेकिन अपनी सीमाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक सैन्य कदम उठाएगा।
- देर रात तक चले हमलों के बाद 2023 से ही लाल सागर में जहाजों की आवाजाही लगभग 60% घट चुकी थी। कई शिपिंग कंपनियों ने अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से घूमकर जाना शुरू कर दिया था, जिससे माल भाड़ा और सामान की कीमतें बढ़ गई थीं। अब यह संकट और ज्यादा गहरा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक आपातकालीन बैठक में यमन के लिए विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने चेतावनी देते हुए कहा, "यह नया घटनाक्रम यमन में चार साल से बनी शांति के अंत का संकेत है। अगर इसे तुरंत नहीं रोका गया, तो इसके भयानक परिणाम केवल यमन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को भुगतने होंगे।"
अमेरिका और यमन की आधिकारिक सरकार ने सुरक्षा परिषद से मांग की है कि हुती विद्रोहियों पर लगे प्रतिबंधों को और कड़ा किया जाए तथा उन्हें हथियारों और तकनीक की सप्लाई पूरी तरह रोकी जाए।
